
"कूटनीति लंबे समय तक सरकारों, राजधानियों और राजनयिकों के बीच होने वाली बातचीत तक सीमित समझी जाती रही। आज उसकी सीमाएँ काफी विस्तृत हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, सांस्कृतिक संगठन, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, कलाकार और युवा स्वयं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के महत्वपूर्ण वाहक बन रहे हैं।" - इसी आलेख से

"एक शोधार्थी के रूप में जब मैं पिछले वर्षों की हिमालयी घटनाओं, वैज्ञानिक अध्ययनों और वर्तमान नेपाल त्रासदी को एक साथ रखकर देखता हूँ तो मुझे सबसे बड़ी कमी संसाधनों की नहीं, बल्कि हमारी सोच में दिखाई देती है। हम अभी भी आपदा को एक घटना मानते हैं, जबकि बदलती जलवायु के दौर में आपदा एक लगातार बढ़ता हुआ जोखिम है।" - इसी आलेख से

न पासपोर्ट, न आधार कार्ड, न वोटर आईडी कार्ड - तो राज्य के द्वारा भारतीय नागरिकों को कौन ऐसा दस्तावेज़ उपलब्ध कराया गया है, जो नागरिकता का सर्वमान्य प्रमाणपत्र है?

प्रस्तुत आलेख में चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में हो रही टूट के बहाने भारत के राजनीतिक परिदृश्य की विवेचना की गयी है।

"कर्नाटक का मतदाता आर्थिक प्रदर्शन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व विश्वसनीयता—तीनों का संयुक्त मूल्यांकन करता है।" - इसी आलेख से

"जब किसी गरीब किसान का बेटा या मजदूर की बेटी विश्वविद्यालय तक पहुँचती है, तब केवल एक छात्र शिक्षित नहीं होता—बल्कि एक पूरा परिवार, एक गाँव और एक पीढ़ी अपने भविष्य को बदलने की संभावना के करीब पहुँचती है।" - इसी आलेख से

"सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है, लेकिन दूसरी तरफ प्रधानमंत्री स्वयं ईंधन बचत की अपील कर रहे हैं। यहीं से राजनीतिक प्रश्न उठते हैं? यदि स्थिति नियंत्रित थी, तो जनता से अचानक इतनी बड़ी मितव्ययिता की माँग क्यों की जा रही है?" - इसी आलेख से

"तमिलनाडु का यह चुनाव केवल सरकार परिवर्तन की घटना नहीं है। यह उस नई राजनीतिक बेचैनी का परिणाम है, जिसमें युवा मतदाता पारंपरिक दलों से अलग विकल्प की तलाश कर रहा है। विजय उसी बेचैनी की राजनीतिक अभिव्यक्ति हैं।" - इसी आलेख से

नीतीश कुमार की कहानी उस राजनीतिक बदलाव की कहानी है, जो, राष्ट्रीय राजनीति के दबाव में, सत्ता के केंद्र से हाशिये की ओर ढकेला जाता है।

"भारतीय राजनीति में आदर्श और व्यवहारिकता के बीच संघर्ष नया नहीं है। अनेक नेता सिद्धांतों की बात करते रहे हैं, लेकिन समय और परिस्थितियों के दबाव में उनके निर्णय बदलते रहे हैं। नीतीश कुमार का हालिया कदम भी शायद इसी राजनीतिक यथार्थ का हिस्सा है।" - इसी आलेख से