शिक्षा-सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के आधारों पर अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को अच्छे स्कूल नहीं कहा जा सकता। कैसे? तथ्यों और तर्कों से अवगत होने के लिए पढ़े यह आलेख.
"राष्ट्रों की भाषा छीनकर और सभी क्षेत्रों में एक अपारदर्शी एवं पराई भाषा थोपकर उन्हें नष्ट करना एक मानक औपनिवेशिक प्रथा रही है, जिससे मूल निवासियों को उच्च और लाभप्रद शिक्षा, ज्ञान, तकनीक, विरासत, इतिहास, संस्कृति और शक्ति एवं लाभ के स्थानों से बाहर रखा जा सके।" इसी आलेख से
शासन की व्यवस्था के भीतर पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों में अक्सर भाषा को अभिव्यक्ति का साधन बताया जाता है। लेकिन भाषा केवल साधन नहीं है, स्वभाव भी है - वर्गीय स्वभाव। प्रस्तुत लेख में भाषा के इसी वर्गीय चरित्र का विश्लेषण किया गया है।