भारतीय भाषाओं को हाशिए पर क्यों और कैसे धकेला गया है?

"राष्ट्रों की भाषा छीनकर और सभी क्षेत्रों में एक अपारदर्शी एवं पराई भाषा थोपकर उन्हें नष्ट करना एक मानक औपनिवेशिक प्रथा रही है, जिससे मूल निवासियों को उच्च और लाभप्रद शिक्षा, ज्ञान, तकनीक, विरासत, इतिहास, संस्कृति और शक्ति एवं लाभ के स्थानों से बाहर रखा जा सके।" इसी आलेख से
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।

पूर्व प्रमुख, भाषाविज्ञान और पंजाबी लेक्सोग्राफी विभाग; पूर्व निदेशक, सेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला
प्रो. जोगा सिंह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं, जिनके शोध और शिक्षण ने भाषाविज्ञान और प्रवासी अध्ययन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Joga Singh
Joga Singh

पूर्व प्रमुख, भाषाविज्ञान और पंजाबी लेक्सोग्राफी विभाग; पूर्व निदेशक, सेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला
प्रो. जोगा सिंह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं, जिनके शोध और शिक्षण ने भाषाविज्ञान और प्रवासी अध्ययन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Articles: 3

2 Comments

  1. जी हार्दिक धन्यवाद। लोक जीवन के माध्यम से आपका योगदान बहुत बड़ा है। लोक जीवन के पन्नों में स्थान पाकर प्रसन्नता हुई।

    • आभार आपका। ‘लोकजीवन’ आप जैसे लोगों के महत्वपूर्ण और गंभीर आलेखों के कारण जाना जाता है। आशा है कि आपका सहयोग निरंतर मिलता रहेगा।

Comments are closed.