"सच्चाई यह है कि दाढ़ी बढ़ाने या भगवा पहन कर टीका ललाट पर लगाने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। मन धार्मिक होना चाहिए। यानी उसे मनुष्यता, करुणा और संवेदना में विश्वास होना चाहिए।" - इसी आलेख से
नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की पराजय का विश्लेषण कई दृष्टियों से किया गया है। इस आलेख में उन अन्तःकारणों की पड़ताल की गई है, जिसके कारण महागठबंधन कमजोर हुआ।
बिहार के चुनाव परिणाम ने हज़ार सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे मौजूँ सवाल है कि चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए या नहीं? यदि उत्तर हाँ है तो फिर उसके लिए क्या किया जाना चाहिए? यह आलेख इन्हीं प्रश्नों से जूझता है।
स्वामी विवेकानंद वेदांत लेकर विदेश पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा अहसास था कि सभी धर्म एक ही राह के राही हैं। जब वे शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग ले रहे थे तो उन्होंने एक किस्सा…
"आजादी की लड़ाई में जाति थोड़ी दबी थी। एकजुटता का बोध बढ़ा था। आजादी के बाद की राजनीति ने जातियों को और गाढ़ा किया है और अब सिर पर नाच रहा है।" - इसी लेख से
"वंशीधर को जब नौकरी मिलती है तो उसका परिवार इसलिए खुश होता है कि इस पद में ऊपरी आमदनी बहुत है। आज ऊपरी आमदनी वाली पढ़ाई है। हम अपने बच्चे को उसी दिशा में ठेल रहे हैं। तब हम आप अच्छी राजनीति और अच्छा समाज कहां से पायेंगे?" - इसी आलेख से
एक बाबा चले थे हिन्दू राष्ट्र बनाने। तीन दिनों में ही भदभदा कर गिर गये। पांव में छाले, देह में बुखार और दिमाग बेहोश। उनकी हनुमान जी से फ़ोन पर बात होती थी। बेहोश जब होने लगे तो उन्होंने हनुमान…