
"NEET जैसी परीक्षाएँ अब “प्रतिभा की परीक्षा” कम और “व्यवस्था की सड़ांध” का प्रतीक अधिक बनती जा रही हैं।" - इसी आलेख से

"जब तक इस संकट को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर देखा जाएगा और उससे आगे गंभीर चिंतन नहीं किया जाएगा, तब तक पेपर लीक की घटनाएँ जारी रहेंगी।" - इसी आलेख से

इस आलेख में 'नो डिटेंशन पालिसी' की समाप्ति की अधिसूचना पर सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि से विचार किया गया है। अंत तक पढ़कर यदि आप अपनी प्रतिक्रिया देते हैं तो इससे वैचारिक प्रक्रिया निर्मित होगी।

बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पेपर लीक मामले के संदर्भ में डॉ० नीरज कुमार का यह आलेख आयोग की प्रणालीगत ख़ामियों को उजागर करता है। यदि ये ख़ामियाँ विद्यमान रहती हैं तो उसके नतीजे इसी प्रकार होते रहेंगे। आवश्यक रूप से पठनीय आलेख।