इस देश को हुआ क्या है? अर्थशास्त्रियों और सरकार की गैरत क्या मर गयी है? व्यापारिक समझौते में टैरिफ लेना लाभकारी है या देना? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शानदार और महान व्यक्ति हैं, क्योंकि व्यापारिक समझौते में मैं टैरिफ ले रहा हूँ और वे दे रहे हैं। पहले वे टैरिफ लेते थे और मैं देता था। डोनाल्ड ट्रंप मोदी जी की प्रशंसा कर रहे हैं और यह इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उनसे टैरिफ वसूलना है। बीजेपी समर्थक जनता खुश रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनैतिक कैरियर बचा रहे, इसलिए प्रशंसा कर रहे हैं और देश तबाह हो जाये, इसलिए टैरिफ लगा रहे हैं।
यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? क्या सचमुच राजनैतिक नेता गैरतहीन हो गये हैं? विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सवाल कर दिया तो संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू कह रहे हैं कि राहुल गांधी देश के लिए खतरनाक व्यक्ति हैं, लेकिन देश को असल खतरा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ओर से है। अमेरिका की शीर्ष अदालत में इतनी गैरत तो है कि उसने राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ वसूली को ही रद्द कर दिया। ट्रंप बौखलाये हुए हैं कि और कह रहे हैं कि मैं जो चाहे कर सकता हूं और केवल टैरिफ नहीं लगा सकता, यह बकवास है। डोनाल्ड ट्रंप गैर राजनीतिक आदमी हैं। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के पूर्व कोई चुनाव नहीं लड़ा था। अकूत संपत्ति के मालिक ट्रंप महज एक व्यापारी रहे हैं। उनके मन में है कि जनता ने जीता दिया, अब वे कुछ भी कर सकते हैं। वे देश और जनता के प्रति नहीं, खुद के प्रति जिम्मेदार हैं। इसी मनमानेपन के कारण वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठवा लिया। ऐसे बदतमीज आदमी से तो कोई समझौता ही नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों के मन में कोई आदर का भाव नहीं होता। वह अहंकार से लैस और धन के पीछे पागल होता है।
लेकिन हम सब क्या कर रहे हैं? नीरो वंशी बजा रहे हैं तो हम सब क्या उनकी तान पर नाच रहे हैं? देश को ट्रंप ने बार-बार बेइज्जत किया। उसने साफ़ साफ़ कहा कि भारत – पाकिस्तान की लड़ाई में मैंने 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए दोनों देशों को धमकाया, तब ये लोग घाटे के डर से लड़ाई बंद की। उनकी बातों में दम इसलिए लगता है, क्योंकि लड़ाई बंद होने की घोषणा भी डोनाल्ड ट्रंप ने ही की। एक अरब चालीस करोड़ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महज चालीस करोड़ के राष्ट्रपति धमका रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की मजबूरी रही होगी। उनका सीना पिचक गया होगा, मगर देश को क्या हुआ है? उसके बुद्धिजीवी, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता, छात्र-नौजवान आखिर कर क्या रहे हैं? ढोलहा पार्टी बन कर जीना भी कोई जीना है? विश्वगुरु बनने का कीर्तन कर रहे थे और मुरदघट्टी में रो रहे हैं। कहाँ है बिना रजिस्ट्रेशन वाले संगठन आर एस एस के सर संघचालक मोहन भागवत जी? अभी भी हिन्दू-मुस्लिम ही कर रहे हैं। इनके बयान का भी आकलन करें तो वे एक जगह नहीं टिकते। कभी कुछ, कभी कुछ। और प्रधानमंत्री जी, नेहरू को कोसने के सिवा और भी कुछ कीजिए। रीढ़ की हड्डी सिर्फ खड़े रहने के लिए ही नहीं बनी है। तनिए भी तभी सार्थक होगी।
सत्ता में बने रहना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात होती है स्वाभिमान के साथ जीना और जिलाना। लेकिन जिन्हें हरदीप पुरी की संगति प्राप्त है और पब्लिक डोमेन में पुरी के बारे में इतनी बातें तैर रही हैं, तब भी उन्हें हटा नहीं रहे तो कुछ भी उम्मीद करना व्यर्थ है। आप जैसे लोगों को तो डोनाल्ड ट्रंप की दुत्कार और फटकार सुननी ही पड़ेगी। देश सुनेगा या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में है।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर






