जन पत्रकारिता, राजनीति, विश्लेषणचरखा और बंदूक: स्वाधीनता के दो समानांतर चक्के"भारतीय इतिहास का सबसे सुंदर यथार्थ यह है कि चरखा और बंदूक परस्पर विरोधी होने के बावजूद एक अनकहे ऐतिहासिक द्वंद्वात्मक रिश्ते में बँधे थे।" - इसी आलेख से Dr. Anil Kumar RoyOctober 1, 2026
इन दिनों, जन पत्रकारिताइन दिनों : विचार सरहदों में नहीं बँधते"जहाँ रचना है, वहाँ सीमाहीनता है। जहाँ कट्टरता है, वहाँ सीमाएँ-ही-सीमाएँ हैं।" - इसी आलेख से डॉ योगेन्द्रMarch 23, 2026