
"वे खूब ज्ञान परंपरा की तलाश करें, लेकिन वे बतायें कि वे ज्ञान परंपराएँ इतनी निर्बल क्यों थीं कि भारतीय परस्पर घृणा करते रहे और देश ग़ुलाम होता रहा?" पढ़िए इस आलेख में

"सच यह है कि आँधी-तूफ़ान तो यहाँ आया हुआ है, जिसमें देश की बौद्धिक क्षमता चुक गई है और अबौद्धिक मेंढक की तरह टर्रा रहा है।" इसी आलेख से

बात केवल शिक्षा के लिए समर्पित स्वतंत्रता सेनानी दीप नारायण सिंह के मकान में जिला जज का आवास बनाने और लाजपत पार्क में लाला लाजपत राय की कोई निशानी नहीं होने भर की नहीं है। बात है एक मुकम्मल इतिहास को दफ़न किए जाने की।