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इन दिनों : वक्त का तराना

"आज़ादी इसलिए नहीं मिली थी कि जिनके पूर्वजों ने ख़ून बहाया, उनकी नागरिकता पर ही सवाल उठने लगे। उन्हें 'परजीवी' और 'कॉकरोच' कहा जाने लगे। ऐसे ही वक़्त में रणभेरी बजती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : नैतिकता और वर्जनाएँ

a black and white photo of the word change
दरअसल संसार वह है जो ससर रहा है यानी बदल रहा है। इस बदलाव के झोंके में नैतिकता और वर्जनाओं के दायरे भी बदल रहे हैं। इस बदलाव के संकट भी है। जानने के लिए पढ़ें यह आलेख