महाभारत हुआ या नहीं, निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन समाज में उस कथा के पात्र जीवित हैं। भीष्म, धृतराष्ट्र, कृष्ण, द्रौपदी, गांधारी, कुंती, कर्ण, दुर्योधन, दु:शासन, युधिष्ठिर, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव, पांडु, अभिमन्यु को तो बहुतायत लोग जानते हैं। इसके अलावे भी बहुत से पात्र हैं, जिन्हें लोग कम जानते हैं। लेकिन उसके बिना महाभारत की कथा बन नहीं सकती। मसलन – दुष्यंत, सत्यवती, वेदव्यास, अश्वत्थामा, द्रुपद, धृष्टद्युम्न, शिखंडी, सुशर्मा, जरासंध, शिशुपाल, धौम्य, शाल्व, शैल्य, अंबा, अंबिका, अंबालिका, विराट, बलराम, सुभद्रा, चित्रांगदा, चित्रांगद, विचित्रवीर्य, माद्री आदि-आदि।
महाभारत-कथा विचित्रताओं से भरी है। धृतराष्ट्र और पांडु अपने माता-पिता के पुत्र नहीं हैं और न विदुर है। तीनों का जन्म नियोग से हुआ है। यानी मां क्रमशः अंबिका, अंबालिका और दासी मर्यादा हैं तो पिता वेदव्यास हैं। माना यह जाता है कि धृतराष्ट्र और पांडु विचित्रवीर्य के पुत्र हैं। विचित्रवीर्य एक लंपट और कामुक व्यक्ति था, जिसकी मृत्यु युवावस्था में ही हो गई थी। इसके बाद धृतराष्ट्र और पांडु का जन्म हुआ। पांडु भी बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं था, इसलिए नियोग के द्वारा ही कुंती से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन का जन्म होता है और माद्री से नकुल और सहदेव का। धृतराष्ट्र और गांधारी के बारे में प्रचलित है कि उसे सौ पुत्र है। सच्चाई यह है कि ज्यादातर पुत्र दासियों के हैं, जिसे धृतराष्ट्र ने पैदा किया। कर्ण को तो कुंवारी कुंती ने जन्म दिया ही था। वेदव्यास का जन्म मत्स्य कन्या सत्यवती और पराशर के संयोग से हुआ। आज की मान्यताओं के अनुसार इन कथाओं को कसने की कोशिश करें तो भयंकर निराशा होगी।
यह कम आश्चर्यजनक नहीं है कि कृष्ण और दुर्योधन समधी थे। कृष्ण के पुत्र सांब और दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा में शादी हुई थी। कृष्ण को यादव माना जाता है तो दुर्योधन को क्षत्रिय। कृष्ण के पिता वसुदेव की दो शादियां थीं। एक देवकी से और दूसरी रोहिणी से। वसुदेव और देवकी से कृष्ण हुए और वसुदेव और रोहिणी से बलराम और सुभद्रा। इस नाते सुभद्रा कृष्ण की बहन है। वसुदेव की बहन है कुंती, इस नाते कुंती कृष्ण की बुआ है। अर्जुन कुंती का पुत्र है। अर्जुन के ममेरे भाई कृष्ण और बलराम हैं और सुभद्रा उसकी ममेरी बहन हैं। आप जानते हैं कि अर्जुन ने सुभद्रा से शादी की। यानी ममेरी बहन से अर्जुन की शादी होती है। शिशुपाल की मां और कुंती बहन है। शिशुपाल पांडवों के मौसेरे भाई हैं। उनकी बेटी करेणुमती से नकुल की शादी होती है।
रिश्तों की अजब-गजब कहानी है महाभारत। अर्जुन की चार शादियाँ हुईं – नाग कन्या उलूपी, मणिपुर की चित्रांगदा, सुभद्रा और द्रौपदी। भीम ने भी तीन शादियाँ कीं- हिडिंबा, काशीराज की कन्या बलंधरा और द्रौपदी। युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव ने भी द्रौपदी के अलावे एक -एक शादी की। महाभारत की कहानी में सबकुछ है – धर्म, अधर्म, नैतिकता, अनैतिकता, सत्य, असत्य, ईर्ष्या, द्वेष, प्रेम , घृणा, हिंसा, अहिंसा।
महाभारत एक मुकम्मल कथा है – आम लोगों की कथा। राजा है, लेकिन लंपट है। रिश्ते ऐसे-ऐसे कि सहज विश्वास नहीं होता। मनुष्य मनुष्य रूप है। छल छद्म है तो मनुष्य के उदात्त रूप भी हैं। हम किसीको पूज सकते हैं तो किसी से नफ़रत कर सकते हैं। हर आदमी के अनेक चेहरे हैं। यहाँ मनुष्य का सरलीकरण नहीं है कि ईमानदार हैं तो वे हर समय ईमानदार ही रहेंगे। उसमें काँटे हैं तो फूल भी हैं। महाभारत मनुष्य के मनोविज्ञान की विवेचना है। पढ़ते हुए आप हैरत में भी पढ़ जाते हैं और आँखें भी भींगती हैं। जब तक यह देश रहेगा, इसके पात्र जीवित रहेंगे और उसकी कहानियाँ भी।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर







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