इन दिनों : कलियुग के अघोषित ईश्वर

"बहुत से लोग इन पर हंसते हैं। जो हंस नहीं पाते, वे विश्वास करते हैं। जो विश्वास नहीं करते, उन्हें भी लगता है कि क्या ठिकाना, जो कह रहे हैं, वही सच हो।" - इसी आलेख से

मुझे पूरी उम्मीद है कि जल्द ही बीजेपी के कई नेता ईश्वर घोषित हो जायेंगे। कोई हनुमान, कोई विष्णु, कोई राम के सहोदर बन जायेंगे। देश धन्य हो जायेगा कि एक साथ हम ईश्वर के विभिन्न प्रकारों के दर्शन कर सकेंगे। इन ईश्वरीय नेताओं का पहला काम होगा कि इतिहास को पटक-पटक कर पीटेंगे। वैसे भी ईश्वर इतिहास में नहीं बंधते। ये मानव योनि में जन्म लेकर अपने को कोस रहे हैं। वे तत्काल इस योनि को त्यागने के मूड में हैं। वे जानते हैं कि ईश्वर के बहुत से रूप हैं। कौन सा ईश्वर कब किसके रूप धर कर अवतरित हो जायें, इसका कोई ठिकाना नहीं। इसलिए हर ईश्वर के लिए वे स्पेस बनाए रखते हैं।

चूंकि वे ईश्वर हैं, इसलिए किताबें नहीं पढ़ते। किताबों में इतिहास लिखा होता है। उन्हें इतिहास से सख्त नफ़रत है। वे इतिहास बकते हैं। वे जब चाहें, जैसे चाहें, किसी को मार सकते हैं, किसी को जिला सकते हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं कि जो वे बकते हैं, वे इतिहास सम्मत हैं या नहीं। उन्हें अपनी अज्ञानता परोसनी है और अपने लोगों को बताना है कि उनकी अज्ञानता ही इतिहास है। बाबर ने महाराणा प्रताप से कभी युद्ध नहीं किया। लेकिन वे दोनों में युद्ध करवायेंगे। नेहरू के पांव की धूल भी नहीं हैं, लेकिन नेहरू से खुन्नस है। इनके लोग नेहरू को मुसलमान साबित करने में लगे रहे। साबित नहीं कर पाये तो अब वे कह रहे हैं कि नेहरू बाबरी मस्जिद बनाना चाहते थे। ये नेता देश के रक्षा मंत्री हैं। जो आदमी अपनी बोली और वाणी की रक्षा न कर पाये, वे देश की रक्षा क्या करेंगे? चीन देश में घुसता जा रहा है। हमारे सैनिकों को पीटता है। रक्षा मंत्री का बकार नहीं खुलता। एक और पढ़ाकू हैं। वे गृह की रक्षा कर रहे हैं। उनका दावा है कि वे इतिहास के विद्यार्थी रहे हैं। लोकसभा में बेशर्मी के साथ सरदार पटेल को 1960 में जीवित बताते हैं, सिर्फ इसलिए कि नेहरू को गाली देनी है।

इन सबके सरदार तो कब क्या बोलेंगे, इसका कोई ठिकाना नहीं। यही वजह है कि वे अब धरती पर नहीं रहना चाहते। वे खगोलीय घटना बनना चाहते हैं। बहुत से लोग इन पर हंसते हैं। जो हंस नहीं पाते, वे विश्वास करते हैं। जो विश्वास नहीं करते, उन्हें भी लगता है कि क्या ठिकाना, जो कह रहे हैं, वही सच हो। जल्द ही यह बात साबित होने वाली है कि नत्थूराम ने गांधी को गोली नहीं मारी, बल्कि गांधी ने नत्थूराम को फांसी पर लटकाया। बिहार में हुए कई नरसंहारों में किसी को सजा नहीं हुई, क्योंकि पुलिस और जज ने किसी को दोषी पाया ही नहीं। शायद यह भी खगोलीय घटना ही है कि लोग अपने से अपना गला रेत रहे हैं। यह क्या कम खगोलीय घटना है कि जो आदमी जबर्दस्ती अपने को अपने देश का ताउम्र राष्ट्रपति घोषित कर लें। विपक्षियों को लापता कर दे। वह किसी अन्य देश में फतवा जारी करे कि फलां किसी के सामने नहीं झुकते। ‌ऐसे लोगों को थोड़ा भी ज्ञान नहीं है कि जो विष्णु के अवतार हैं। क्षीर सागर में शयन करते हैं।‌ वे भला झुकेंगे कैसे? लोकतंत्र में झुकने और खड़े होने की कला उन्हें आती नहीं। डींगें मारने की बात अलग है।

खैर। सुबह मैंने देखा कि एक स्त्री बुदबुदाते हुए सूरज को हाथ जोड़े खड़ी थी। एक आदमी समारोह के उपरांत फेंकें गये जूठन में कुछ ढूंढ रहा था। तीन युवक अपनी मोटरसाइकिल दूर में खड़ी कर आपस में आदान-प्रदान कर रहे थे । मंदिर में ‘नारायण-नारायण’ की ध्वनि आ रही थी। सड़कों पर धूल उड़ाती ट्रकें भाग दौड़ कर रही थीं।

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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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