इन दिनों : राजनीति में लैटरल इंट्री

नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।
प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर





स्वामी विवेकानंद वेदांत लेकर विदेश पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा अहसास था कि सभी धर्म एक ही राह के राही हैं। जब वे शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग ले रहे थे तो उन्होंने एक किस्सा…



एक बाबा चले थे हिन्दू राष्ट्र बनाने। तीन दिनों में ही भदभदा कर गिर गये। पांव में छाले, देह में बुखार और दिमाग बेहोश। उनकी हनुमान जी से फ़ोन पर बात होती थी। बेहोश जब होने लगे तो उन्होंने हनुमान…

