डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : आदमी होने की कसौटी

black and white human statue
"मृत्यु सिर्फ देह की क्षय से नहीं होती। देह रहते हुए भी मृत्यु हो जाती है। आपके अंदर का इंसान जैसे-जैसे छीजता जाता है, वैसे-वैसे आपकी मृत्यु होती जाती है। वह समाज मृत ही समझिए, जहाँ इंसानियत का टोटा पड़ जाता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : जीने की कला में छेद

"हमारे देश में अनेक धर्म, अनेक जाति और अनेक संस्कृतियाँ हैं। जो बहुल संस्कृति से प्यार करेगा, वही सच्चा भारतीय होगा।" इसी आलेख से

इन दिनों : असभ्य घटनाओं पर चुप्पियों के अर्थ

"यह देश जिसे गर्व है कि पहले यहाँ सभ्यता उतरी। दुनिया का सबसे पुराना ग्रंथ वैदिक साहित्य जहाँ सृजित हुआ, वहाँ मल-मूत्र से भरा पानी हजारों लोगों को पिला दिया जाता है। पंद्रह सनातनी मर चुके हैं और सैकड़ों अस्पताल में छटपटा रहे हैं। क्या यह सभ्यता है?" - इसी आलेख से

इन दिनों : बुद्धिखोरों की सड़ांध

"मुझे गर्व होता है कि मैं उस देश का वासी हूँ, जहाँ बुद्ध हुए हैं, लेकिन मुझे बुद्धिखोरों को लेकर शर्म आती है कि तात्कालिक लाभ के लिए इन्होंने अपने को गिरवी रख दिया है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : ट्रंप की दादागिरी और वेनेजुएला के सबक

"जिस युग में किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को घसीट कर बंधक बनाया जा रहा हो, उस युग को ज्ञान का युग कहना, भारी बेवकूफी है। ट्रंप को जिसने वोट दिया, वह समझे कि एक बददिमाग आदमी को उसने वोट दिया है। अगर लोग सावधान नहीं रहे तो ट्रंप दुनिया को गटर बना देगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : बदलते वक्त में बेचैन चेतना

old man, old age, time, year, loneliness, old man, old man, old man, old man, old man
"सुख कब दुख में बदल जाता है, कहा नहीं जा सकता। देह बहुत सुखी हुआ तो डायबिटीज, ब्ल्डप्रेशर, कैंसर। मन को ज्यादा सुख मिला तो अकेलापन।" - इसी आलेख से

इन दिनों : उच्च शिक्षा का हाल- बेहाल

student, study, university, student, student, student, study, study, study, study, study
"कोई मक्खी यों ही नहीं निगलता। इसके लिए मूल्य चुकाने होते हैं। यह मूल्य पैरवी और पैसे के रूप में चुकाए जाते हैं, लेकिन इस मूल्य के बदले में मरती है उच्च शिक्षा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : नया साल, नया कदम, नयी चुनौती

man in black shirt sitting on grass field near lake during daytime
"हम काल के साथ जितनी दूरी तय करते हैं, वह समय का एक खंड ही है। हम समय को खंडित कर ज्ञान प्राप्त करते हैं। यही वजह है कि हमारा ज्ञान खंडित होता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : 2025 का सफर, ये कैसा सफर

‘अवतार’ फिल्म का गाना है – ‘दिन महीने साल गुजरते जायेंगे, हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जायेंगे।’ कोई दिन या क्षण नहीं ठहरा, तो बरस 25 भी नहीं ठहरा। समय ससर रहा है। अविराम बहता-सा रहा है। मनुष्य…

कुछ कुछ होता है

" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से