
"नफ़रत नयी दुनिया नहीं रच सकती। हिंसा सदा विध्वंस करती है। आज मनुष्य के अंदर जो व्याकुलता है, वह सामान्य व्याकुलता नहीं है। इस व्याकुलता ने मनुष्य के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है, क्योंकि यह व्याकुलता में रचने की ख्वाहिश नहीं है। एक तरह से विध्वंस का आह्वान है।" - इसी आलेख से

दरअसल संसार वह है जो ससर रहा है यानी बदल रहा है। इस बदलाव के झोंके में नैतिकता और वर्जनाओं के दायरे भी बदल रहे हैं। इस बदलाव के संकट भी है। जानने के लिए पढ़ें यह आलेख

"हाट से जानवर तक देखभाल कर लेते हैं और जिन्हें देश के नेतृत्व के लिए चुनते हैं, उन्हें कम से कम लापरवाही या भड़काऊ बयानों के आधार पर न चुनें।" इसी आलेख से

"यह घटना मर्दवादी समाज की पोल खोलती ही है, साथ ही बताती है कि मनुष्य अभी तक निरा जानवर ही है। ज्ञान और विवेक उसे छू तक नहीं पाया है। सत्ता और धन का केंद्रीकरण मौजूदा विकास की जड़ में है।" - इसी आलेख से

"कोई देश यों ही विश्वगुरु नहीं हो जाता। जहाँ महात्मा भी बलात्कार करते हों और इन महात्माओं की चरण वंदना सत्ता में बैठे लोग करते हों, ऐसे देश को विश्व गुरु बनने से कौन रोक सकता है।" - इसी आलेख से

"नैतिकता कोई जड़ चीज नहीं है। समय, काल और स्थान पर नैतिकता परिवर्तित हो जाती है।" - इसी आलेख से