"धरम के वरद पुत्र कितने अधार्मिक हैं! इन्हें वंदे मातरम् का शौक चढ़ा है। मातरम् के पुत्रों को खूब कूटो और वंदे मातरम् के जरिए देश में घृणा का माहौल बनाओ।" - इसी आलेख से
सुबह सूरज ठीक से उगा नहीं। सूरज पर कटे-कटे बादल छाये रहे। ठंड के कारण खिड़कियां बंद रहती हैं, इसलिए चिड़िया के स्वर सुनाई नहीं पड़े। खिड़कियों में लगे शीशे के बाहर सबकुछ शांत लगता है। आम, नारियल और महुगनी…
"देश भौंचक है। सरकार क्या केवल अपना एजेंडा चलायेगी और विपक्ष को ही सिरफिरा साबित करेगी। दुर्भाग्य यह है कि विपक्ष की मांग को प्रधानमंत्री ड्रामा कह रहे हैं।" - इसी आलेख से
हमाम में नंगे लोग अगर सबको कपड़े पहनने का आह्वान करे तो उसकी बात कोई क्यों मानेगा? जिसके हाथ अपराधियों को टिकट देने से नहीं कांपे और हत्यारोपी विधायक बनाता रहे, उसके राज में अपराध खत्म कैसे होगा?
"आज भी नीतीश कुमार के अंदर इच्छाएं जोर मारती हैं, लेकिन शरीर उस काबिल नहीं रहा। चेतना भी दूर होती जा रही है। अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग अपना कंधा लगाये हुए हैं। सम्मान सहित कुर्सी से उतरना ज्यादा सारगर्भित होता, धक्के मार कर कुर्सी से हटाना बहुत बुरा होगा।" - इसी आलेख से
नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की पराजय का विश्लेषण कई दृष्टियों से किया गया है। इस आलेख में उन अन्तःकारणों की पड़ताल की गई है, जिसके कारण महागठबंधन कमजोर हुआ।
बिहार के चुनाव परिणाम ने हज़ार सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे मौजूँ सवाल है कि चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए या नहीं? यदि उत्तर हाँ है तो फिर उसके लिए क्या किया जाना चाहिए? यह आलेख इन्हीं प्रश्नों से जूझता है।