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इन दिनों : पप्पू से राउडी

"बीजेपी ने जिसे 'पप्पू' कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह 'राउडी' कैसे हो गया? ...... बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र की जैसी-तैसी की, बार-बार निशाना ठोकता रहा कि सीधा बैल मरखंडा हो गया।" - इसी आलेख से

इन दिनों : वसंत की नवरचना और अमेरिकी डील

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"आजकल ऐसा लगता है कि देश दिल्ली से नहीं वाशिंगटन से चलता है। अमेरिका यह कहे कि भारत को तेल खरीदना पड़ेगा और रूस से वह तेल नहीं खरीदेगा। अगर चोरी छुपे रूस से तेल खरीदा तो उस पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगायेंगे। भारत सरकार उसकी बात मान लेता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सैंया को कोतवाल नहीं होना चाहिए

अगर लोकतंत्र के प्रति आस्था न हो, तो लोकतांत्रिक ढंग से चुन कर आने के बाद या तत्कालीन राजनैतिक शख्सियत से समझौता कर भी आप लोकतंत्र का हत्यारा हो सकते हैं। लोकतंत्र को खत्म करने के लिए कोई जरूरी नहीं…

दुख का दर्शन

"आज हम, भारत के लोग सिर्फ़ इसलिए कष्ट नहीं झेल रहे कि देश की अर्थव्यस्था संकट में है। बल्कि हमारे सामने आपदा यह है कि जितना भी संसाधन हमारे पास है, उसका प्रबंधन हम, भारत के लोग नहीं कर पा रहे हैं।" - कैसे? पढ़ें यह आलेख

इन दिनों : फाइव ट्रिलियन का सपना और लोगों पर बुलडोजर

"संसद में भी काँव-काँव हो रहा है। मैं अपने गाँव में देखता था कि दो औरतों ने लड़ाई की शुरूआत की, फिर उनके साथ अन्य औरतें झींका देने आ गई।‌ खूब लड़ाई हुई। गर्जन भी और गालियाँ भी। सभी को मालूम है कि नतीजा कुछ नहीं आयेगा।‌ संसद की हालत गाँव की गली से बदतर है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : लोकतंत्र पर मंडराते खतरे

संसद अब सवाल और जवाब नहीं, आरोप और प्रत्यारोप की जगह हो गयी है। राष्ट्र के अस्तित्व और लोकतंत्र की बुनियाद के जरूरी प्रश्न भी भद्दी बहसों में खो जाती है।

इन दिनों : वंदे मातरम और माता की रुलाई

"मान लिया कि उन्हें महात्मा गांधी और नेहरू पसंद नहीं है। उनकी तस्वीरें हिन्दू महासभा और आरएसएस के दफ्तरों में नहीं लगाती जा सकतीं। कम-से कम-सरदार पटेल, रवीन्द्रनाथ टैगोर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीरें तो लगाते। मगर किसी आर एस एस के दफ्तर में इनकी तस्वीरें नहीं हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : यह नए युग की संसद है साहिबान!

"देश भौंचक है। सरकार क्या केवल अपना एजेंडा चलायेगी और विपक्ष को ही सिरफिरा साबित करेगी। दुर्भाग्य यह है कि विपक्ष की मांग को प्रधानमंत्री ड्रामा कह रहे हैं।" - इसी आलेख से