दुख का दर्शन

"आज हम, भारत के लोग सिर्फ़ इसलिए कष्ट नहीं झेल रहे कि देश की अर्थव्यस्था संकट में है। बल्कि हमारे सामने आपदा यह है कि जितना भी संसाधन हमारे पास है, उसका प्रबंधन हम, भारत के लोग नहीं कर पा रहे हैं।" - कैसे? पढ़ें यह आलेख
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युवा लेखक और चिंतक, दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री ( गोल्ड मेडलिस्ट)

सुकांत कुमार
सुकांत कुमार

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