
"संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता रहता है। जन्म लेता है तो मन विराट रहता है। परिवार और समाज के बीच रहते हुए संकीर्ण होता जाता है।" -इसी आलेख से

"हम एक अँधेरी गुफा में धँसते जा रहे हैं, जहाँ अपनी मौत का ही उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।" - इसी आलेख से

"युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।" - इसी आलेख से

"चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।" - इसी आलेख से

फर्जी इतिहास-बोध न केवल अपनी विरासत को नकारता है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी नकारता है। कैसे? पढ़ें यह लेख।

हमारी संस्कृति में नशापान अनन्य रूप से शामिल है। देवी-देवता नशापान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शराब और भाँग-धतूरे का प्रयोग होता है। फिर भी कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

"विष से भरे बाण कलेजे में चुभोए जा रहे हैं और जिसे चुभाया जा रहा है, वह उसे अमृत मान रहा है।" इसी आलेख से

"वतन के वास्ते मिट गए बिस्मिल जैसे हज़ारों लोग और अब के सत्ताधारी स्वार्थ के वास्ते वतन को ही चींथ रहे हैं।" - इसी आलेख से

"वे खूब ज्ञान परंपरा की तलाश करें, लेकिन वे बतायें कि वे ज्ञान परंपराएँ इतनी निर्बल क्यों थीं कि भारतीय परस्पर घृणा करते रहे और देश ग़ुलाम होता रहा?" पढ़िए इस आलेख में

"अड़ानी एनटीपीसी स्थल में ज्योंही हमलोगों ने प्रवेश किया, पहाड़िया जाति के बीसों स्त्री-पुरुष आ गए। ये लोग हताश-निराश हैं। कोई आता है तो उनके अंदर हल्की-सी आशा बंध जाती है।" इसी आलेख से