डॉ योगेन्द्र

डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग


पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

इन दिनों : सामाजिक न्याय और जातिवाद

"देश‌ को तीसरी राह की जरूरत है, जिसके केंद्र में राष्ट्र हो, सभी नागरिकों के लिए उसमें स्पेस हो, जाति उच्छेद करने की सच्ची ख्वाहिशें हों और आर्थिक समानता की जिद हो। सामाजिक और सांस्कृतिक एकता की बुलंद आवाज़ हो। वह न अन्याय करे और किसी को अन्याय करने दे।" - इसी आलेख से

इन दिनों : दिल्ली प्रदूषण का हल है पब्लिक पालिका

"देश का वास्तविक विकास ट्रिक्ल डाउन थ्योरी से नहीं, बल्कि ‘रेनफाल थ्योरी' के आधार पर होना चाहिए यानी रिस-रिस कर बूंद-बूंद विकास नहीं होगा, बल्कि हर जगह एक तरह से विकास होगा। कोई गैर बराबरी नहीं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : आदिवासी समाज में हलचल के मायने

"आजादी के बाद जनता कमजोर हुई है और तंत्र मजबूत हुआ है। लोकतंत्र के लिए यह बड़ा खतरा है। तंत्र की मजबूती के बाद शक्तियों का केंद्रीकरण होता है और यह शक्तियां एक व्यक्ति में निहित हो जाती हैं । इस प्रक्रिया में जनता पीछे छूटती जाती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : मुख्यमंत्री का कारुणिक अवसान बहुत कुछ कहता है

"आज भी नीतीश कुमार के अंदर इच्छाएं जोर मारती हैं, लेकिन शरीर उस काबिल नहीं रहा। चेतना भी दूर होती जा रही है। अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग अपना कंधा लगाये हुए हैं। सम्मान सहित कुर्सी से उतरना ज्यादा सारगर्भित होता, धक्के मार कर कुर्सी से हटाना बहुत बुरा होगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : धार्मिकता और कट्टरता

"सच्चाई यह है कि दाढ़ी बढ़ाने या भगवा पहन कर टीका ललाट पर लगाने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। मन धार्मिक होना चाहिए। यानी उसे मनुष्यता, करुणा और संवेदना में विश्वास होना चाहिए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : राजनीति में लैटरल इंट्री

नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश‌ की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।

इन दिनों : यादें और दुःस्वप्न

"सीधा-सीधा दस हजारी योजना वोट खरीद योजना है।‌ लोकतंत्र का आधार चुनाव है और चुनाव को धीरे-धीरे रसातल में लेकर जा रहे हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सेठाश्रयी संस्कृति के गुनाहगार

AI से जेनरेट किया गया प्रतीकात्मक चित्र
लोग शांत इसलिए हैं, क्योंकि वे सरकार और पूँजीपतियों की बेईमानी नहीं समझ रहे हैं। यह देश के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहा है।

इन दिनों : कुछ सवाल खुद से, कुछ सवाल आपसे

बिहार के चुनाव परिणाम ने हज़ार सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे मौजूँ सवाल है कि चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए या नहीं? यदि उत्तर हाँ है तो फिर उसके लिए क्या किया जाना चाहिए? यह आलेख इन्हीं प्रश्नों से जूझता है।

इन दिनों : स्वामी विवेकानंद और धार्मिक कट्टरवाद

स्वामी विवेकानंद वेदांत लेकर विदेश पहुंचे थे, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा अहसास था कि सभी धर्म एक ही राह के राही हैं। जब वे शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग ले रहे थे तो उन्होंने एक किस्सा…