इन दिनों : असली लोकतंत्र का दृश्य: जेसीबी में लटके युवक

सड़कों के किनारे बसे हुए लोग केवल झुग्गी-झोपड़ियाँ ही नहीं खड़ी करते, बल्कि अपने लिए रोज़ी-रोजगार भी खड़े करते हैं। जब सरकार शहर की सफाई के नाम पर झोपड़ियों को उजाड़ती है तो केवल झोपड़ी नहीं उजड़ती है, बल्कि उन ग़रीबों का रोज़गार भी उजड़ता है।
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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