इन दिनों : बदलते वक्त में बेचैन चेतना

"सुख कब दुख में बदल जाता है, कहा नहीं जा सकता। देह बहुत सुखी हुआ तो डायबिटीज, ब्ल्डप्रेशर, कैंसर। मन को ज्यादा सुख मिला तो अकेलापन।" - इसी आलेख से
प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर




‘अवतार’ फिल्म का गाना है – ‘दिन महीने साल गुजरते जायेंगे, हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जायेंगे।’ कोई दिन या क्षण नहीं ठहरा, तो बरस 25 भी नहीं ठहरा। समय ससर रहा है। अविराम बहता-सा रहा है। मनुष्य…





