इन दिनों : शीर्ष पर बैठे घाघ लोग

"जब देश आजाद हुआ तो एक राष्ट्रीय सरकार बनी थी, जिसमें विरोधियों को भी जगह मिली थी। पचास-साठ वर्षों तक विरोधियों के साथ दुश्मन की तरह व्यवहार नहीं किया गया, लेकिन इधर के वर्षों में दोनों की ऐसी तनातनी है जैसे दोनों दो देश का नेतृत्व कर रहे हों।" - इसी आलेख से
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प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर

डॉ योगेन्द्र
डॉ योगेन्द्र

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग

पूर्व डीएसडब्ल्यू, ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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