शिक्षक और कुत्तों की गिनती : बिहार सरकार की वैचारिक बीमारी

"बिहार में शिक्षक को कक्षा से बाहर निकालने की एक स्थायी परंपरा बन चुकी है।......... हर बार तर्क एक ही दिया जाता है—“काम ज़रूरी है”। लेकिन सवाल यह है कि क्या बच्चों की पढ़ाई ज़रूरी नहीं? क्या शिक्षा हमेशा स्थगित की जा सकने वाली गतिविधि है?" - इसी आलेख से
(खबर का स्क्रीनशॉट)
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शिक्षक, भौतिक बिज्ञान
कोषाध्यक्ष, बिहार राज्य समिति, एटक

अमर नाथ
अमर नाथ

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कोषाध्यक्ष, बिहार राज्य समिति, एटक

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One comment

  1. जब सत्ता पर नालायक आसीन हो जाएँ तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।

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