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20 साल की सत्ता से राज्यसभा तक

नीतीश कुमार की कहानी उस राजनीतिक बदलाव की कहानी है, जो, राष्ट्रीय राजनीति के दबाव में, सत्ता के केंद्र से हाशिये की ओर ढकेला जाता है।

सिद्धांत और सत्ता के बीच फँसी नीतीश की राजनीति

"भारतीय राजनीति में आदर्श और व्यवहारिकता के बीच संघर्ष नया नहीं है। अनेक नेता सिद्धांतों की बात करते रहे हैं, लेकिन समय और परिस्थितियों के दबाव में उनके निर्णय बदलते रहे हैं। नीतीश कुमार का हालिया कदम भी शायद इसी राजनीतिक यथार्थ का हिस्सा है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : एक मुख्यमंत्री का करुण अवसान

"चार महीने पूर्व भी मैंने लिखा था कि नीतीश कुमार के लिए बढ़िया है कि वे अब सम्मानपूर्वक विदा हो जायें, मगर लिप्सा कम खतरनाक नहीं होती। अंततः उनका कारुणिक अवसान हुआ- मुँह लिपलिपाते और पेट पर हाथ फेरते।‌" इसी आलेख से

इन दिनों : महाभारत की पटकथा लिखी जा रही है

"महाभारत कथा में लिखा हुआ है कि जब द्रौपदी का चीरहरण होने लगा तो कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या कहा, भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य आदि चुप रहे। दु:शासन ने जंघा पर द्रौपदी को बैठने के लिए कहा। माननीयों का यह कुकर्म ख़ून की नदियों में तब्दील हो गया।‌" - इसी आलेख से

इन दिनों : माथे पर मुरैठा और दिमाग में नफ़रत की नदी

आज डॉ० अम्बेडकर का परिनिर्वाण दिवस है और बाबरी मस्जिद को ढाहने का दिवस भी। अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस के दिन बाबरी मस्जिद को ढाहने वाले आज भी झुग्गी-झोपड़ियों को ढाहते चले जा रहे हैं।

इन दिनों : सैंया भए कोतवाल

सुबह सूरज ठीक से उगा नहीं। सूरज पर कटे-कटे बादल छाये रहे। ठंड के कारण खिड़कियां बंद रहती हैं, इसलिए चिड़िया के स्वर सुनाई नहीं पड़े। खिड़कियों में लगे शीशे के बाहर सबकुछ शांत लगता है। आम, नारियल और महुगनी…

इन दिनों : गिद्ध और मांस की पोटली की आधुनिक कथा

हमाम में नंगे लोग अगर सबको कपड़े पहनने का आह्वान करे तो उसकी बात कोई क्यों मानेगा? जिसके हाथ अपराधियों को टिकट देने से नहीं कांपे और हत्यारोपी विधायक बनाता रहे, उसके राज में अपराध खत्म कैसे होगा?

इन दिनों : मुख्यमंत्री का कारुणिक अवसान बहुत कुछ कहता है

"आज भी नीतीश कुमार के अंदर इच्छाएं जोर मारती हैं, लेकिन शरीर उस काबिल नहीं रहा। चेतना भी दूर होती जा रही है। अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग अपना कंधा लगाये हुए हैं। सम्मान सहित कुर्सी से उतरना ज्यादा सारगर्भित होता, धक्के मार कर कुर्सी से हटाना बहुत बुरा होगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : ताड़ खड़खड़ाते हैं केवल, चील गीध ही गाते

"डॉ लोहिया ने कहा था कि पांच सालों तक जिंदा कौमें इंतजार नहीं करतीं। सच पूछिए तो जिंदा कौमें की एक शमां तो बननी चाहिए।" - इसी लेख से

इन दिनों : नेताओं का धर्म – अपराध और जाति का संरक्षण

'लोकजीवन' के 'इन दिनों' कॉलम में प्रो० योगेंद्र बिहार की राजनीति में अपराध और जाति के राजनीतिक संयोजन की चर्चा कर रहे हैं।