Tag भारत

इन दिनों : लालटेन युग का सुख और रोबोटिक युग का दुःख

"यह सब जानकर आपको लग रहा होगा कि उन दिनों बहुत पिछड़ा समाज था। हाँ, उन दिनों सामान कम था, मगर संबंधों का अद्भुत आनंद था- माँ, पिता, भाई, बहन तो थे ही, काका, काकी, चचेरा भाई, बहन, भौजाइयों का हुजूम था।" इसी आलेख से

इन दिनों : जाति के दड़वों की घुटन

"जाति एक दड़वा बनाती है, जिसमें इंसान घुटता रहता है। जाति के हजारों दड़वे हैं और उन दड़वों में इंसान जितना भी स्नान कर ले, लेकिन देह पर फिर भी मैल जमी ही रहती है, मुक्तिबोध के ब्रह्मराक्षस की तरह।" - इसी आलेख से

इन दिनों : राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संघर्ष में हारता एक देश

"यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? क्या सचमुच राजनैतिक नेता गैरतहीन हो गये हैं?" - इसी आलेख से

जो उचित लगे, वही करो!

"मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल रहा है। सरकार क्या यह अपनी उपलब्धि बता रही है? पूरा का पूरा टेलीकॉम सेक्टर निजी हाथों में है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सैंया को कोतवाल नहीं होना चाहिए

अगर लोकतंत्र के प्रति आस्था न हो, तो लोकतांत्रिक ढंग से चुन कर आने के बाद या तत्कालीन राजनैतिक शख्सियत से समझौता कर भी आप लोकतंत्र का हत्यारा हो सकते हैं। लोकतंत्र को खत्म करने के लिए कोई जरूरी नहीं…

इन दिनों : कहाँ आ गये हम, यों ही चलते-चलते

"मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं - सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह किसी से ट्रेनिंग नहीं लेती। मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। वह जन्म लेता है और माँ-पिता, सगे-संबंधी, समाज और परिस्थितियाँ उसे ट्रेन करने लगते हैं।" - इसी आलेख से

भारत पढ़ाकुओं का सिरमौर कैसे है?

दुनिया में सबसे अधिक पढ़नेवाले देशों में भारत का स्थान दूसरा है। जबकि यहाँ बमुश्किल 10 प्रतिशत लोग मैट्रिक पास हैं। उनकी पढ़ाई का स्तर भी श्लाघनीय नहीं है। तो फिर वे कौन हैं, जिनके कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे पढ़ाकू देश है? - पढ़िए इस आलेख में।

असमानता और सार्वजनिक शिक्षा के बीच संबंध

shallow focus photo of girl holding newspaper
दुनिया के अलग-अलग देशों में गहरी आर्थिक असमानता है और यह असमानता एक देश के भीतर अलग-अलग-क्षेत्रों और समुदायों में भी चिंताजनक रूप से व्याप्त है। यह आर्थिक असमानता शैक्षिक अवसरों की असमानता सृजित करती है और शैक्षिक असमानता सामाजिक-आर्थिक असमानता को पुनर्स्थापित करती है।

भारतीय राजनीति के संकट और अमेरिका की नयी राजनीति के सबक 

आलेख में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर के रूप में चुने जाने वाले ममदानी और काउंसलर के रूप में निर्वाचित होने वाले कम्युनिस्ट नेताओं की राजनीतिक रणनीति की विवेचना है और इसके साथ ही जन-जुड़ाव के चुनावी अभियान की संभावना की भारतीय राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में पड़ताल है।

विदेशी पूंजी-पलायन और रुपये का अवमूल्यन (2025): भारतीय अर्थव्यवस्था के अधूरे संक्रमण का राजनीतिक–अर्थशास्त्रीय पाठ

"रुपये का गिरना कोई आकस्मिक दुर्घटना नहीं; यह भारतीय विकास मॉडल के भीतर छिपे उस अंतर्विरोध का परिणाम है, जिसे तीन दशक से अनदेखा किया जा रहा है।" - इसी आलेख से