हाले-लोकतंत्र

"जिस तरह से कार्यपालिका अर्थ का बंटाधार कर रही है, मुझे लगता है इस लोकतंत्र को एक चौथे और मजबूत खंभे की जरूरत है, जो अर्थ का संचार न्याय-संगत कर सके। मैं पब्लिक पालिका की प्रस्तावना आपके सामने रखता हूँ।" - इसी आलेख से
जन पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए उपर्युक्त QR Code को स्कैन करके 20, 50 या 100 रुपये की सहायता राशि प्रदान कर सकते हैं।
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युवा लेखक और चिंतक, दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री ( गोल्ड मेडलिस्ट)

सुकांत कुमार
सुकांत कुमार

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