ना जी-राम-जी, ना मनरेगा

"क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि सिर्फ़ हमारा दिया आयकर सीधा स्थानीय इकाई को मिले, हमारे वार्ड और को पंचायत मिले। अकेला इनकम टैक्स ही सारे टैक्सों का 22 प्रतिशत होता है। केंद्र अपने पास 17% कॉर्पोरेट टैक्स रख ले। ऐसा करने से स्थानीय इकाई के पास कितने पैसे हैं, इसका पता चल पाएगा।" - इसी आलेख से
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युवा लेखक और चिंतक, दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री ( गोल्ड मेडलिस्ट)

सुकांत कुमार
सुकांत कुमार

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