
"संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता रहता है। जन्म लेता है तो मन विराट रहता है। परिवार और समाज के बीच रहते हुए संकीर्ण होता जाता है।" -इसी आलेख से

"हम एक अँधेरी गुफा में धँसते जा रहे हैं, जहाँ अपनी मौत का ही उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।" - इसी आलेख से

नीति राजसत्ता की वह परिकल्पना होती है, जो यह दिखाती है कि व्यवस्था को किन रास्तों से होकर कहाँ तक ले जाना है। इसकी भूमिका दिशा-निर्देशक की होती है। राज्य नीतियाँ बनाता है और फिर उन नीतियों को अमल में लाने के लिए क्रियान्वयन की योजना का निर्माण करता है। यद्यपि नीतियाँ न तो बाध्यकारी होती हैं और न ही उनका कोई कानूनी आधार होता है। फिर भी एक नैतिक दवाब बनाने में इसकी भूमिका होती है। अन्य नीतियों की तरह इस शिक्षा नीति का भी यही महत्व है यह शिक्षा का अवसर मुहैया कराने और उसका परिणाम प्राप्त करने के दृष्टिकोण को उजागर करती है।

"युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।" - इसी आलेख से

"चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।" - इसी आलेख से

फर्जी इतिहास-बोध न केवल अपनी विरासत को नकारता है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी नकारता है। कैसे? पढ़ें यह लेख।

हमारी संस्कृति में नशापान अनन्य रूप से शामिल है। देवी-देवता नशापान करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शराब और भाँग-धतूरे का प्रयोग होता है। फिर भी कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

आजादी के संघर्ष में "भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केवल एक संगठन नहीं थी, बल्कि वह उस चेतना का नाम थी, जिसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया।" - इसी आलेख से

"विष से भरे बाण कलेजे में चुभोए जा रहे हैं और जिसे चुभाया जा रहा है, वह उसे अमृत मान रहा है।" इसी आलेख से

"वतन के वास्ते मिट गए बिस्मिल जैसे हज़ारों लोग और अब के सत्ताधारी स्वार्थ के वास्ते वतन को ही चींथ रहे हैं।" - इसी आलेख से