
"प्रेम की गति अजीब होती है। बात बात में ‘आई लव यू' कहने वाला संभव है कोई लव नहीं करे और कोई भितरघुन्ना कुछ न कहे और लव में अपने को शहीद कर दे।" - इसी आलेख से

"पक्ष और विपक्ष में परस्पर विश्वास न हो, तो लोकतांत्रिक व्यवहार का क्षरण होता है। प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता पर इसकी जिम्मेदारी ज्यादा होती है कि वह लोकतंत्र को बचाये रखे। व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी लोकतंत्र को नष्ट करने में सहायक होती है।" इसी आलेख से

"कार्नेलिया दूसरे देश की है, मगर भारतवर्ष के सौंदर्य और स्वभाव पर मुग्ध है। मगर आज क्या हो रहा है। कार्नेलिया जो अनजान क्षितिज थी, उसे देश सहारा देता था, मगर आज अपने वाशिंदों का भी सहारा छीनने को उत्सुक है।" - इसी आलेख से

"विपक्ष बस सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सदन का तो पता नहीं, पर इतना सुनकर मुझे तो यकीन हो गया मुझे ज़रूर गुमराह किया जा रहा। पक्ष हो, या विपक्ष, सरकार किसी की भी हो, होती तो जनता के लिए ही है।" इसी आलेख से

"बीजेपी ने जिसे 'पप्पू' कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह 'राउडी' कैसे हो गया? ...... बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र की जैसी-तैसी की, बार-बार निशाना ठोकता रहा कि सीधा बैल मरखंडा हो गया।" - इसी आलेख से

"हमें जाति विनाश के बारे में सोचना चाहिए, न कि उसकी जड़ में पानी और खाद देकर लहकाना चाहिए। लोकतंत्र लोगों का तंत्र है, वह जाति या संप्रदाय का तंत्र नहीं है।" - इसी आलेख से

"मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल रहा है। सरकार क्या यह अपनी उपलब्धि बता रही है? पूरा का पूरा टेलीकॉम सेक्टर निजी हाथों में है।" - इसी आलेख से

"महाभारत कथा में लिखा हुआ है कि जब द्रौपदी का चीरहरण होने लगा तो कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या कहा, भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य आदि चुप रहे। दु:शासन ने जंघा पर द्रौपदी को बैठने के लिए कहा। माननीयों का यह कुकर्म ख़ून की नदियों में तब्दील हो गया।" - इसी आलेख से

"आजकल ऐसा लगता है कि देश दिल्ली से नहीं वाशिंगटन से चलता है। अमेरिका यह कहे कि भारत को तेल खरीदना पड़ेगा और रूस से वह तेल नहीं खरीदेगा। अगर चोरी छुपे रूस से तेल खरीदा तो उस पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगायेंगे। भारत सरकार उसकी बात मान लेता है।" - इसी आलेख से

"देश के वाणिज्य मंत्री से पूछा गया कि क्या भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब उनका जवाब था कि विदेश मंत्री ज़वाब देंगे। जब यही सवाल विदेश मंत्री जयशंकर से पूछा गया, तो उनका जवाब था कि इस प्रश्न का उत्तर वाणिज्य मंत्री देंगे। ये लोग देश चला रहे हैं! " - इसी आलेख से