"बाहरी लोगों के लिए वह जंगल पर्यटन-स्थल था, प्राकृतिक धरोहर था, सेल्फी-पॉइंट था। लेकिन गाँव के लोगों के लिए राशन कार्ड था, औषधालय था, रोजगार था और सुरक्षा भी।" - इसी आलेख से
"दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति, उसी तरह की भयावह भीड़, किसी पौराणिक मंदिर की तरह एक घंटे में एक-दो कदम सरकने वाली स्थिति से होते हुए हम भीतर लिफ्ट से ऊपर पहुँचे, जहाँ गैलरी में देखने के नाम पर ऐसा कुछ नहीं था। कुछ आदमकद ऐतिहासिक फोटोज, बस!" - इसी आलेख से
"कोई मक्खी यों ही नहीं निगलता। इसके लिए मूल्य चुकाने होते हैं। यह मूल्य पैरवी और पैसे के रूप में चुकाए जाते हैं, लेकिन इस मूल्य के बदले में मरती है उच्च शिक्षा।" - इसी आलेख से
"हम काल के साथ जितनी दूरी तय करते हैं, वह समय का एक खंड ही है। हम समय को खंडित कर ज्ञान प्राप्त करते हैं। यही वजह है कि हमारा ज्ञान खंडित होता है।" - इसी आलेख से
‘अवतार’ फिल्म का गाना है – ‘दिन महीने साल गुजरते जायेंगे, हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जायेंगे।’ कोई दिन या क्षण नहीं ठहरा, तो बरस 25 भी नहीं ठहरा। समय ससर रहा है। अविराम बहता-सा रहा है। मनुष्य…
" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से
"क्रिसमस में चर्च जल रहे, युवाओं को पार्क में पीट रहे, नदी - मंदिर में किसी खास को जाने से रोक रहे। दूसरे धर्म के त्योहार में रुकावट बन रहे हैं तो अपने त्योहार को तमाशा बनाने पर तुले हैं। अरे, जबकि यह बस धर्म का विषय नहीं है, यह आपकी संस्कृति के हनन का विषय है।" - इसी आलेख से
"कोई देश यों ही विश्वगुरु नहीं हो जाता। जहाँ महात्मा भी बलात्कार करते हों और इन महात्माओं की चरण वंदना सत्ता में बैठे लोग करते हों, ऐसे देश को विश्व गुरु बनने से कौन रोक सकता है।" - इसी आलेख से
दुनिया के कई देशों की शिक्षा प्रणाली बेहतर मानी जाती है और कई प्रसंगों में उदाहृत होती है। इस लेख में कई देशों की शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर विहंगम दृष्टि डाली गयी है ताकि वैश्विक परिप्रेक्ष्य को समझ सकें और अपने देश की शिक्षा व्यवस्था के बारे में सोच सकें।