"मुझे गर्व होता है कि मैं उस देश का वासी हूँ, जहाँ बुद्ध हुए हैं, लेकिन मुझे बुद्धिखोरों को लेकर शर्म आती है कि तात्कालिक लाभ के लिए इन्होंने अपने को गिरवी रख दिया है।" - इसी आलेख से
"इतिहास बताता है कि साम्राज्य अपने सबसे घमंडी दौर में ही गिरावट की ओर बढ़ते हैं। ट्रंप का खुला विस्तारवाद, उसकी बेशर्म भाषा और वेनेजुएला पर किया गया हमला उसी घमंड का प्रतीक है। सवाल यह नहीं कि अमेरिका क्या चाहता है; सवाल यह है कि दुनिया कब तक इस लूट और कब्ज़े को चुपचाप देखती रहेगी।" इसी आलेख से
"जिस युग में किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को घसीट कर बंधक बनाया जा रहा हो, उस युग को ज्ञान का युग कहना, भारी बेवकूफी है। ट्रंप को जिसने वोट दिया, वह समझे कि एक बददिमाग आदमी को उसने वोट दिया है। अगर लोग सावधान नहीं रहे तो ट्रंप दुनिया को गटर बना देगा।" - इसी आलेख से
"बाहरी लोगों के लिए वह जंगल पर्यटन-स्थल था, प्राकृतिक धरोहर था, सेल्फी-पॉइंट था। लेकिन गाँव के लोगों के लिए राशन कार्ड था, औषधालय था, रोजगार था और सुरक्षा भी।" - इसी आलेख से
"दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति, उसी तरह की भयावह भीड़, किसी पौराणिक मंदिर की तरह एक घंटे में एक-दो कदम सरकने वाली स्थिति से होते हुए हम भीतर लिफ्ट से ऊपर पहुँचे, जहाँ गैलरी में देखने के नाम पर ऐसा कुछ नहीं था। कुछ आदमकद ऐतिहासिक फोटोज, बस!" - इसी आलेख से
"कोई मक्खी यों ही नहीं निगलता। इसके लिए मूल्य चुकाने होते हैं। यह मूल्य पैरवी और पैसे के रूप में चुकाए जाते हैं, लेकिन इस मूल्य के बदले में मरती है उच्च शिक्षा।" - इसी आलेख से
"हम काल के साथ जितनी दूरी तय करते हैं, वह समय का एक खंड ही है। हम समय को खंडित कर ज्ञान प्राप्त करते हैं। यही वजह है कि हमारा ज्ञान खंडित होता है।" - इसी आलेख से
‘अवतार’ फिल्म का गाना है – ‘दिन महीने साल गुजरते जायेंगे, हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जायेंगे।’ कोई दिन या क्षण नहीं ठहरा, तो बरस 25 भी नहीं ठहरा। समय ससर रहा है। अविराम बहता-सा रहा है। मनुष्य…
" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से