चौक के बीचोंबीच
एक आदमी खड़ा है।
उसके गले में फूलों की माला है —
फूल ताज़ा हैं,
हाथ तालियों से लाल हैं,
चेहरों पर गर्व है।उसके सीने पर एक तख्ती टँगी है—
“घोर अमानवीय अपराध का दोषी”लेकिन कोई पढ़ नहीं रहा।
या शायद पढ़कर भी
कोई देख नहीं रहा।तालियों की आवाज़
इतनी तेज़ है
कि नैतिकता की आवाज़
दम घुटकर गिर चुकी है।थोड़ी दूरी पर,
भीड़ की परछाइयों में
एक लड़की बैठी है।न कोई नाम,
न कोई चेहरा।सिर झुका हुआ,
आँखें ज़मीन में गड़ी हुईं।उसके पास
एक बुझा हुआ दीपक है—
जिसे उसने जलाया था
न्याय की उम्मीद में।दीपक बुझ चुका है,
लेकिन धुआँ अभी उठ रहा है।पीछे की दीवार पर
न्याय का तराज़ू टँगा है—
एक पलड़ा फूलों से दबा है,
दूसरा खाली।संविधान की किताब
आधी फटी हुई है,
जैसे किसी ने कहा हो—
“आज इसकी ज़रूरत नहीं।”फूल बरस रहे हैं
लेकिन खुशबू नहीं है।
तालियाँ बज रही हैं
लेकिन गर्व नहीं है।यह उत्सव नहीं है।
यह समाज का नैतिक शवदाह है।
विश्वगुरु बनने के लिए पहला अनिवार्य काम यह है कि बलात्कारियों की जाति की पहचान करो। अगर आपकी जाति के बलात्कारी हैं तो उनके पूजन-अर्चन करो। यह मानो कि आपकी महान जाति में बलात्कार करने के गुण मौजूद हैं। आप हरगिज इस बात की चिंता न करें कि किसका बलात्कार हुआ? बलात्कार करने में पीड़िता को कोई तकलीफ़ पहुँची या नहीं? आपका दायित्व है कि उसके परिवार पर थूकें और टोले मुहल्ले में बदनाम करें। अगर पीड़िता या उसका परिवार थाने जा रहे हैं तो सुपारी देकर निपटा देना आपका फर्ज है।
कोई देश यों ही विश्वगुरु नहीं हो जाता। विश्वगुरु बनने के लिए नये-नये तरीके अपनाने पड़ते हैं। अगर आप अपने बलात्कारियों को माला पहनाकर स्वागत करेंगे तो माना जायेगा कि आपकी जाति बलात्कार करने में गोल्ड मेडल प्राप्त कर सकती है। आपके पूर्वज गर्व करेंगे कि हमारी जाति में ऐसे भी वीर बांकुड़ों ने जन्म लिया है। आप यह निश्चित मानें कि अगर बलात्कारी का संबंध सत्ता दल से है, तब तो चांदी ही चांदी है। किसकी हिम्मत है कि आपसे टकरा सके। ऐसे मौके पर सत्ता में बैठे लोग मूक हो जायेंगे। लगेगा कि घोड़े की लगाम इनके मुँह में लग गयी है। उनकी चमड़ी मोटी हो जायेगी और आपका खूब समर्थन करेंगे। भारत भूमि पर ऐसे लोगों के आविर्भाव से विश्वगुरु बनने का रास्ता क्लियर हो जायेगा। बलात्कारियों को कोई नहीं दबोच सकता। पुलिस हो या सीबीआई – उसके पास अपार बुद्धि है। आपके केस को कोर्ट के सामने ऐसे पेश करेंगे कि केस में कोई दम नहीं रहेगा। महान देश के न्यायाधीश हर वक्त महान होते हैं। वे भी बलात्कारियों की जाति और रसूख का ख्याल रखते हैं। अपना फैसला ऐसे देते हैं कि लगेगा – पीड़िता ने खुद अपना बलात्कार किया है।
एक महात्मा है। एक नहीं कई महात्मा हैं। महात्माओं की एक टोली है। जो नाचते, गाते, चन्दन टीका लगाते और प्रवचन झाड़ते हैं। उनमें से कुछ महात्माओं को बलात्कार करने की लत है। दुर्भाग्यवश एकाध जेल तक भी पहुँच गए। दूसरे महात्माओं को लगता है कि उसकी जाति के लोगों को बदनाम किया जा रहा है। सो, वे अपने प्रवचन में बलात्कारी महात्मा का समर्थन करते हैं। कोई देश यों ही विश्वगुरु नहीं हो जाता। जहाँ महात्मा भी बलात्कार करते हों और इन महात्माओं की चरण वंदना सत्ता में बैठे लोग करते हों, ऐसे देश को विश्व गुरु बनने से कौन रोक सकता है। ध्यान सिर्फ यह रखना है कि बलात्कारी आपकी जाति का हो। यह नहीं कि आपकी जाति का वह हो जाय, जिसका बलात्कार हुआ हो।
जब बलात्कारी जेल से छूट कर बाहर आता है, तब बान-शान के साथ लोग स्वागत करते हैं। ऐसे मौके पर आप अपनी छाती फूला लें। दुनिया में ऐसे समारोह कहीं नहीं होते। भाग्य मनाइए कि आपके यहाँ यह समारोह होता है। ऐसे समारोह को आप तुरंत स्मार्टफोन में कैद करें और फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया पर शेयर करें। टी वी चैनल पर भी आपके समर्थक एंकर और डिबेटर मौजूद हैं। वे ऐसा-ऐसा तर्क निकालेंगे कि आप भौंचक्का रह जायेंगे। ये लोग जिसका बलात्कार हुआ है, उसको ऐसा लताड़ेंगे कि आपको लगेगा कि ये लोग बलात्कार करने योग्य ही है। जिसके साथ बलात्कार हुआ हो, उसके पिता को थाने में बंद कर इतना पिटवाओ कि वह दम तोड़ दे । इससे देश तुरंत विश्वगुरु होने की दिशा में अग्रसर हो जायेगा।
देश को विश्व गुरु बनना है तो कुछ लोगों को तो शहीद होना पड़ेगा। विकास के लिए आदिवासियों को और विश्वगुरु बनने के लिए पीड़िता और उसके परिवार को शहीद तो होना पड़ेगा।

प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग
पूर्व डीएसडब्ल्यू,ति मां भागलपुर विश्वविद्यालय,भागलपुर






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