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इन दिनों : लोकतंत्र पर मंडराते खतरे

संसद अब सवाल और जवाब नहीं, आरोप और प्रत्यारोप की जगह हो गयी है। राष्ट्र के अस्तित्व और लोकतंत्र की बुनियाद के जरूरी प्रश्न भी भद्दी बहसों में खो जाती है।

भारतीय राजनीति के संकट और अमेरिका की नयी राजनीति के सबक 

आलेख में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर के रूप में चुने जाने वाले ममदानी और काउंसलर के रूप में निर्वाचित होने वाले कम्युनिस्ट नेताओं की राजनीतिक रणनीति की विवेचना है और इसके साथ ही जन-जुड़ाव के चुनावी अभियान की संभावना की भारतीय राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में पड़ताल है।

इन दिनों : मत रो माता, लाल तेरे बहुतेरे

"धरम के वरद पुत्र कितने अधार्मिक हैं! इन्हें वंदे मातरम् का शौक चढ़ा है। मातरम् के पुत्रों को खूब कूटो और वंदे मातरम् के जरिए देश में घृणा का माहौल बनाओ।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सैंया भए कोतवाल

सुबह सूरज ठीक से उगा नहीं। सूरज पर कटे-कटे बादल छाये रहे। ठंड के कारण खिड़कियां बंद रहती हैं, इसलिए चिड़िया के स्वर सुनाई नहीं पड़े। खिड़कियों में लगे शीशे के बाहर सबकुछ शांत लगता है। आम, नारियल और महुगनी…

इन दिनों : यह नए युग की संसद है साहिबान!

"देश भौंचक है। सरकार क्या केवल अपना एजेंडा चलायेगी और विपक्ष को ही सिरफिरा साबित करेगी। दुर्भाग्य यह है कि विपक्ष की मांग को प्रधानमंत्री ड्रामा कह रहे हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : गिद्ध और मांस की पोटली की आधुनिक कथा

हमाम में नंगे लोग अगर सबको कपड़े पहनने का आह्वान करे तो उसकी बात कोई क्यों मानेगा? जिसके हाथ अपराधियों को टिकट देने से नहीं कांपे और हत्यारोपी विधायक बनाता रहे, उसके राज में अपराध खत्म कैसे होगा?

इन दिनों : मुख्यमंत्री का कारुणिक अवसान बहुत कुछ कहता है

"आज भी नीतीश कुमार के अंदर इच्छाएं जोर मारती हैं, लेकिन शरीर उस काबिल नहीं रहा। चेतना भी दूर होती जा रही है। अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग अपना कंधा लगाये हुए हैं। सम्मान सहित कुर्सी से उतरना ज्यादा सारगर्भित होता, धक्के मार कर कुर्सी से हटाना बहुत बुरा होगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : राजनीति में लैटरल इंट्री

नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश‌ की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।

इन दिनों : यादें और दुःस्वप्न

"सीधा-सीधा दस हजारी योजना वोट खरीद योजना है।‌ लोकतंत्र का आधार चुनाव है और चुनाव को धीरे-धीरे रसातल में लेकर जा रहे हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सेठाश्रयी संस्कृति के गुनाहगार

AI से जेनरेट किया गया प्रतीकात्मक चित्र
लोग शांत इसलिए हैं, क्योंकि वे सरकार और पूँजीपतियों की बेईमानी नहीं समझ रहे हैं। यह देश के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर रहा है।