
सभ्यता का तक़ाज़ा है कि लोग शांति और सुख की ओर बढ़ें। लेकिन विश्व में हड़पने की होड़ ने हत्याओं और विनाश का अंतहीन दौर चल पड़ा है। हमारी सभ्यता का आज यही चेहरा बन गया है।

"प्रकृति की किसी भी चीज़ को मनुष्य ने निर्मित नहीं किया, फिर इन पर मनुष्य का एकाधिकार क्यों हो? ये तमाम चीज़ें सबके लिए हैं और किसी लालची तानाशाह को इसे बर्बाद करने की छूट देना मनुष्यता के साथ द्रोह है।" इसी आलेख से

" राजनीतिक दलों के लिए खून-पसीना बहाते हैं उसके कार्यकर्ता, मगर कार्यकर्ताओं पर नेताओं को भरोसा नहीं होता, इसलिए गोदाम में पड़े अपने पुत्र-पुत्रियों को धो-पोंछ कर व गाल पर पाउडर मल कर निकाल लाते हैं। और फिर उनके जयकारे लगने लगते हैं।" इसी आलेख से

"भारतीय राजनीति में आदर्श और व्यवहारिकता के बीच संघर्ष नया नहीं है। अनेक नेता सिद्धांतों की बात करते रहे हैं, लेकिन समय और परिस्थितियों के दबाव में उनके निर्णय बदलते रहे हैं। नीतीश कुमार का हालिया कदम भी शायद इसी राजनीतिक यथार्थ का हिस्सा है।" - इसी आलेख से

"प्रधानमंत्री ने विदेशी दौरे पर अरबों रूपये लुटाए और जिसका कुल नतीजा है कि वे ट्रंप के ट्रैप में हैं।" इसी आलेख से

"चार महीने पूर्व भी मैंने लिखा था कि नीतीश कुमार के लिए बढ़िया है कि वे अब सम्मानपूर्वक विदा हो जायें, मगर लिप्सा कम खतरनाक नहीं होती। अंततः उनका कारुणिक अवसान हुआ- मुँह लिपलिपाते और पेट पर हाथ फेरते।" इसी आलेख से

"हाट से जानवर तक देखभाल कर लेते हैं और जिन्हें देश के नेतृत्व के लिए चुनते हैं, उन्हें कम से कम लापरवाही या भड़काऊ बयानों के आधार पर न चुनें।" इसी आलेख से

"अरविंद केजरीवाल आज आज कैमरे के सामने रो रहे हैं। कैमरे के सामने रोने में नरेंद्र मोदी जी भी अव्वल हैं। दोनों ड्रामा किंग हैं।" - इसी आलेख से

"चाहे लिखित हो या नहीं, हर देश काल में हर समाज के पास एक संविधान रहा है। संविधान ऐसे नियम-क़ानूनों का दस्तावेज है, जो उस समाज की राजनीति की हदों को निर्धारित करती है।" इसी आलेख से

"देश में सत्ता की ओर से फैलाई जा रही नफ़रत और हिंसा के शिकार कौन होगा, कहा नहीं जा सकता। इतना भर जरूर कहा जा सकता है कि आसार अच्छे नहीं हैं।" - इसी आलेख से