Tag परिवारवाद

इन दिनों : बुद्धिजीवियों के छल

"राजनीति में सुपुत्रों की कोई कमी नहीं है। हमाम में अब सब नंगे हैं। इसकी आलोचना और निंदा भरपूर करें। राजनीति में गिरावट के प्रति भी चिंतित हों, लेकिन मेरा सवाल है कि राजनीति में गिरावट की क्या यह अकेली वजह है?" - इसी आलेख से

इन दिनों : सत्य की छाती पर असत्य का तांडव

a close up of a typewriter with a paper that reads election fraud
"आंदोलन की शमा कब की बुझ चुकी। उससे जो आंदोलनकारी निकले, सत्ता में जाकर उन्होंने कोई नया इतिहास नहीं लिखा, बल्कि जिन मुद्दों के खिलाफ आंदोलन किया, उन्हीं में वे समा गए।" - इसी आलेख से

इन दिनों : कमाबे लंगोटिया, खाय लंब धोतिया

" राजनीतिक दलों के लिए खून-पसीना बहाते हैं उसके कार्यकर्ता, मगर कार्यकर्ताओं पर नेताओं को भरोसा नहीं होता, इसलिए गोदाम में पड़े अपने पुत्र-पुत्रियों को धो-पोंछ कर व गाल पर पाउडर मल कर निकाल लाते हैं। और फिर उनके जयकारे लगने लगते हैं।" इसी आलेख से

सिद्धांत और सत्ता के बीच फँसी नीतीश की राजनीति

"भारतीय राजनीति में आदर्श और व्यवहारिकता के बीच संघर्ष नया नहीं है। अनेक नेता सिद्धांतों की बात करते रहे हैं, लेकिन समय और परिस्थितियों के दबाव में उनके निर्णय बदलते रहे हैं। नीतीश कुमार का हालिया कदम भी शायद इसी राजनीतिक यथार्थ का हिस्सा है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : राजनीति में लैटरल इंट्री

नेता पति, पत्नी, बेटा, बेटी, समधी, समधन - सभी देश‌ की सेवा के लिए न्यौछावर हो गये। देश इनका कृतज्ञ हैं। वे सेवा किए जा रहे हैं और देश सेवा नहीं ले पा रहा है। देश सेवा के लिए जगह कम है और देश सेवक बहुत हैं।