Category इन दिनों

इन दिनों : और चाँद चू गया

A clear view of the full moon against a blue night sky with a bare tree in the foreground.
"चाँद तो सूरज से रोशनी लेता है। आदमी भी एक-दूसरे से ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान ही तो आदमी की रोशनी है, वरना आठ जगहों से टेढ़े अष्टावक्र जनक के दरबारियों को चुनौती कैसे देता!" - इसी आलेख से

इन दिनों : अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़त्म…

man and woman sitting on rock near sea during daytime
"यह सच है कि काल की चक्की चल रही है, एक दिन उस चक्की में पिसना ही है, मगर मनुष्य आख़िर सच्ची ख़ुशी कहाँ से लाये?" - इसी आलेख से

इन दिनों : छाती पीटने और हाय-हाय करने के चैम्पियन

"प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जानते थे कि जिस तरह की शर्तें वे महिला आरक्षण बिल में जोड़ रहे हैं, उन्हें विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। इन शर्तों को लागू करने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, जो उनके पास है नहीं। फिर उन्होंने अचानक लोकसभा की बैठक क्यों बुलाई?" - इसी आलेख से

इन दिनों : आँधी में भी गाँधी जी

man in black and white plaid shirt wearing eyeglasses
"डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर सभा हो और गांधी का ज़िक्र न हो, यह असंभव है। पूना पैक्ट के संदर्भ में गांधी पर कटाक्ष करना तो स्वभाव में शामिल हो गया है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय

gray printing paper on white surface
"हर जाति ने अपने नायक ढूँढ लिया है। आज़ादी की लड़ाई में वैसे नायक ढूँढे जाते थे, जिन्होंने देश के लिए शहादत दी हो। अब जब खा-पीकर तगड़े हो रहे हैं तो देखादेखी हरेक जाति ने अपने-अपने नायकों की तलाश शुरू की।" - इसी आलेख से

इन दिनों : एक बार, जाल फेंक रे मछेरे

Man in blue shirt casting fishing net into vibrant ocean waves, showcasing traditional fishing techniques.
"हर क्षण हम थोड़ा-थोड़ा जीते और मरते जाते हैं। जो चीज़ें छूट जाती हैं, वे मर ही तो जाती हैं। अपने अंदर मृत्यु हर वक़्त नाचती रहती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी….

आशा भोंसले ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अस्सी वर्ष बिताए और बीस भाषाओं में बारह हज़ार से अधिक गीत गाये। वे अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्हीं की याद करते हुए यह आलेख।

इन दिनों : डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए

"हिन्दू समाज का जो भयानक दुर्गुण है, वह जाति ही है। जाति को क़ायम रखते हुए कोई हिंदू अपनी श्रेष्ठता का दावा नहीं कर सकता।" इसी आलेख से

इन दिनों : संवैधानिक मताधिकार और चुनाव आयोग के ठहाके

एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र
"आज़ादी मिली तो भारतीयों को वयस्क मताधिकार मिला। संविधान ने गारंटी दी कि हर भारतीय को वोट देने का अधिकार है और सभी के वोट बराबर होंगे। संविधान के इस मूलभूत अधिकार को चुनाव आयोग ही नष्ट कर रहा है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अनासक्ति और कामना 

A tranquil Buddha statue surrounded by lush greenery and vibrant plants in a serene garden.
"संसार से मुक्त होने की कामना भी क्या एक कामना नहीं है? मनुष्य भावनाओं और विचारों की दुनिया में छटपटाता रहता है। जन्म लेता है तो मन विराट रहता है।  परिवार और समाज के बीच रहते हुए संकीर्ण होता जाता है।" -इसी आलेख से