Category जन पत्रकारिता

मुझे तो इहलोकतंत्र चाहिए!

a large crowd of people standing in a street
"क्या है इहलोकतंत्र? मैंने पाया यह दुनिया मेरी है। मैं इसे लिख रहा हूँ, ना सिर्फ़ शब्दों में, बल्कि अपने कर्मों से। मैंने अपने कर्म लिख डाले।" - इसी आलेख से

इन दिनों : ईरान एक सीख भी है और सबक भी

"धर्म मनुष्य की एक कमजोर नस है, जिसे सहला कर सत्ता तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन बुनियादी समस्याओं को सुलझा नहीं सकते। जो देश धार्मिक बन गये हैं, उस देश की जनता लोकतांत्रिक शासन चाहती है। और, जो देश धार्मिक बन नहीं पाया, उस देश में धार्मिक कट्टरता सत्ता दिला रही है।" इसी आलेख से

आप क्या चाहते हैं?

"जीवन अर्थवान है। इस अर्थ के वितरण की एक परिकल्पना है, पब्लिक पालिका। इस लोकतंत्र को एक चौथा मजबूत खंभा चाहिए, वह खंभा आर्थिक हो सकता है। पत्रकारिता तो दर्शक मात्र है। कहीं से सुनकर ख़बरें सुनाती है। आर्थिक अगर कोई खंभा होता तो सोचिए!" - इसी आलेख से।

इन दिनों : मैं, आप और मिराबेला माडल

"अमेरिका और जापान जैसे देशों में एक प्रयोग हो रहा है, जिसमें युवा और बुजुर्ग दोनों साथ-साथ रहते हैं और दोनों एक दूसरे से सीखते हैं, जिसे ‘मिराबेला माडल' के नाम से पुकारा जा रहा है।‌ न्यूयॉर्क की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने यह प्रयोग किया है।" - कैसे? पढ़िए इस आलेख में।

नहीं मत मारो

woman reading books
"हम मूर्ख हैं, या बनाये जा रहे हैं? अब तो समझ भी नहीं आता। कॉलेज के खुलने नहीं, बंद हो जाने के ढोल पीटे जा रहे हैं, क्योंकि अधर्मियों का दाखिला हो गया था। लगता तो है, हम मूर्ख हैं भी, और बनाये भी जा रहे हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : चंचल बुद्धि के युग और हवा में पतंग बने हनुमान

"ज्ञानियों की एक जमात की हालत साँप-छुंछदर वाली है। जीना है तो सत्ता के चरण पखारने हैं। नतीजा है कि वे अपनी चंचल बुद्धि के बदौलत जैसे-जैसे सत्ता बदलती है, वे भी बदल जाते हैं। दल बदलू नेताओं की कोई कमी इस भारतभूमि पर पहले भी नहीं थी, अब विचार - बदलू नेताओं की कोई कमी नहीं है।" - इसी आलेख से

जब तेल पर यथार्थवाद, तो भूगोल पर संकोच क्यों?

"ईरान के साथ संबंधों का कमजोर होना भारत की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और यूरोप तक पहुँच को सीमित करेगा—और यह एक ऐसी रणनीतिक रिक्तता होगी, जिसे भरने के लिए चीन तत्पर रहेगा।" - इसी आलेख से

कहानी नहीं बदलती

"मेरा सपना सरल है, सीधा है। सपना वही है, जो बापू ने दिखाया था। ग्राम स्वराज का सपना। उनकी सिर्फ़ इच्छा ही नहीं थी, उनके पास प्लान भी था। ....... उन्होंने विस्तार से अपना दर्शन समझाया भी है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : डमरूवाद का घनचक्कर

"आर एस एस या बीजेपी के कार्यकताओं को हिन्दू एकता इसलिए चाहिए कि उनकी सत्ता कायम रहे। राम कथा वाचक भी जाति गिनते नजर आते हैं। उन्हें अपने ब्राह्मण होने पर बहुत गर्व है। इन लोगों को हिन्दू राष्ट्र चाहिए। इनके स्वभाव और विचार से ऐसा लगता है कि उन्हें ऐसा हिन्दू राष्ट्र चाहिए जिसमें जाति का वर्चस्व कायम रहे।" इसी आलेख से

हर कोई शास्त्री

"हम सबको मिलकर शिक्षा के बारे में सोचना ही होगा। एक ऐसी शिक्षा, जो जानवरों को ऐसा इंसान बना सके, जिसे जानवरों से भी सहानुभूति हो। यहाँ तो जानवरों के नाम पर भी भ्रष्टाचार चल रहा है, और नारे लग रहे हैं कि धर्म ख़तरे में है। होगा ही। जहाँ जीवन ख़तरे में हो, वहाँ धर्म पर दुधारी तलवार तो लटकती ही रहेगी।" - इसी आलेख से