"जिस मुख्यमंत्री को संविधान से प्यार नहीं है, उसे सम्मान नहीं देता, उस मुख्यमंत्री को कुर्सी पर क्यों रहना चाहिए? राष्ट्रपति उसे बर्खास्त क्यों नहीं करतीं और प्रधानमंत्री उसे सजा क्यों नहीं देते?" - इसी आलेख से
'जब मैं किताब हाथ में लेकर पढ़ा करता था, या किसी कॉपी पर अपनी कलम से लिख रहा होता था, तब सिर्फ़ मेरी वैचारिक स्मृति ही नहीं, Image Memory भी बन रही होती थी। ....." इसी आलेख से
अगर लोकतंत्र के प्रति आस्था न हो, तो लोकतांत्रिक ढंग से चुन कर आने के बाद या तत्कालीन राजनैतिक शख्सियत से समझौता कर भी आप लोकतंत्र का हत्यारा हो सकते हैं। लोकतंत्र को खत्म करने के लिए कोई जरूरी नहीं…
"आज हम, भारत के लोग सिर्फ़ इसलिए कष्ट नहीं झेल रहे कि देश की अर्थव्यस्था संकट में है। बल्कि हमारे सामने आपदा यह है कि जितना भी संसाधन हमारे पास है, उसका प्रबंधन हम, भारत के लोग नहीं कर पा रहे हैं।" - कैसे? पढ़ें यह आलेख
"बजट समता कायम करने नहीं, आर्थिक गैर बराबरी बढ़ाने के लिए लाया जाता है। यह अमीरों का उपक्रम है। सरकार सिर्फ इतना जानती है कि गरीबों से वोट लेना है और वोट लेने के लिए पैसा चाहिए।" - इसी आलेख से
शिक्षा, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक पुनरुत्पादन और नागरिक चेतना के निर्माण का माध्यम रही है, नवउदारवादी पूँजीवाद के चरण में एक ऐसी वस्तु में रूपांतरित की जा रही है जिसे बाज़ार में खरीदा–बेचा जा सकता है। राज्य, जो शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समानता और पुनर्वितरणकारी न्याय की भूमिका निभाने वाला कारक था, अब पूँजी के हितों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का स्थानांतरण कर रहा है। इस प्रक्रिया में नागरिक श्रम–शक्ति के वाहक और ऋणग्रस्त उपभोक्ता में बदलता जा रहा है, जबकि कॉर्पोरेट शिक्षा के क्षेत्र में मूल्य–अधिशेष के नए स्रोत के रूप में स्थापित हो रहा है।
"मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं - सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह किसी से ट्रेनिंग नहीं लेती। मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। वह जन्म लेता है और माँ-पिता, सगे-संबंधी, समाज और परिस्थितियाँ उसे ट्रेन करने लगते हैं।" - इसी आलेख से
"बीजेपी जातिवादी और संप्रदायवादी पार्टी है। उसके जेहन और उसके समर्थक संगठनों में जातिवादी विषाणु है। वह अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू एकता की बात करती है, लेकिन जाति खत्म करने की बात नहीं करती।" - इसी आलेख से
"जब तक किसी को अशिक्षा, बीमारी, और युद्ध से मुनाफा होता रहेगा, कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकारों की पहली प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य होना चाहिए, जो हमें सिर्फ़ वहीं मिल सकता है, जहाँ हम रहते हैं।" - इसी आलेख से
"पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 100 छात्रों ने आत्महत्या की है। इनमें से प्रायः सभी छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से थे।" - इसी आलेख से