Category जन पत्रकारिता

इन दिनों : सागर होता आदमी

people on beach during daytime
"मनुष्य में संभावनाएँ बहुत हैं। वह बहुत तरल होता है। उसमें संवेदनाएं बहती रहती हैं, इसलिए उसमें बदलाव की अपार संभावनाएँ हैं। वह परिस्थितियों का शिकार भी होता है और उसे बदल भी देता है।" - इसी आलेख से

मैं रिपब्लिक हूँ

flag hanging on pole
"गणतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें सत्ता किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक चेतना और सहमति की होती है। सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने की क्षमता हर जन के मन में हो, बस यही गणतंत्र है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : चिंता और चिंतन

"चिंता होती है, तभी चिंतन होता है। चिंता तात्कालिक स्थितियों से जुड़ी होती है और चिंतन चिंता की एक समझ है और है चिंता से उबरने के लिए रास्ते की तलाश।‌ अगर चिंता न हो, तो चिन्तन संभव ही नहीं है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सफर के क्षण

"यह दुनिया आज नदी, सागर और जंगल के खिलाफ खड़ी है। जिन कारकों से दुनिया का सृजन हुआ है, आज नयी दुनिया को उत्पादित करने के लिए उनके खिलाफ ही खड़ी है।" इसी आलेख से

ना जी-राम-जी, ना मनरेगा

"क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि सिर्फ़ हमारा दिया आयकर सीधा स्थानीय इकाई को मिले, हमारे वार्ड और को पंचायत मिले। अकेला इनकम टैक्स ही सारे टैक्सों का 22 प्रतिशत होता है। केंद्र अपने पास 17% कॉर्पोरेट टैक्स रख ले। ऐसा करने से स्थानीय इकाई के पास कितने पैसे हैं, इसका पता चल पाएगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : अधूरे अनुभवों के सत्य-असत्य

a sandy beach next to the ocean with palm trees
"गोवा के शहर और गाँव में बहुत अंतर नहीं है। बस या कार से जब आप चलेंगे तो स्थानीय घरों को देख कर पता करना मुश्किल होता है कि ये घर गाँव के हैं या शहर के। बहुत से घरों की छत चौड़े वाले खपड़ों से बनी है।" - गोवा के बारे में और जानने के लिए पढ़ें यह आलेख

धर्म का धरना

"जब धर्म गुरुओं को भी हड़ताल करने की नौबत आ जाए, तब तो हमें इस भ्रम से बाहर आ जाना चाहिए कि मंदिर के वहीं बन जाने से कोई चमत्कार नहीं हो पाएगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सफर और सांस्कृतिक उदात्तता

people on beach during daytime
"भारत में तरह-तरह के रजवाड़े हुए और उनकी आपसी लड़ाई हुई। उनके बीच के अंतर्विरोध और संघर्ष ने बाहरी लोगों को अवसर दिया। आज भारत की एकता के लिए बहुसांस्कृतिक एकता की जरूरत है।" - इसी आलेख से

अर्थ, बाज़ार और सरकार

a man standing in front of a fruit and vegetable stand

अर्थशास्त्र की बुनियाद अभाव पर टिकी है, और वाणिज्यशास्त्र का आधार व्यापार पर। आइए! समझते हैं कैसे? इस अध्याय में हम दोनों का अंतर समझेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि इनकी हमारी जिंदगी में क्या जरूरत है। जरूरी…

इन दिनों : मंदिरों की ऊँचाई और असली हिन्दुस्तान

Lord Shiva statue
"पंडितों ने भी गजब कहर बरपा रखा है। ठंड है तो मंदिरों के देवता काँपने लगते हैं। पंडित ऊनी कपड़े का इंतजाम करते हैं। गर्मी है तो एयरकंडीशन। देवताओं के लिए हर मौसम में यथोचित इंतजाम है। देवता खुश, पंडित खुश।" - इसी आलेख से