
"“स्वराज” एक राजनैतिक अवस्था ही नहीं है, यह एक दार्शनिक चित्रण है जो हमारे चरित्र में प्रतिबिंबित होना चाहिए। स्वराज सिर्फ एक विचार ही नहीं, व्यवहार है।" - इसी आलेख से

"एक तरह से देखा जाए तो जब सरकार पब्लिक द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में असफल हो जाती है, तब उसे सत्ता में बने रहने के लिए दंडनीति का प्रयोग करना पड़ता है। साम-दाम-दंड-भेद सब जायज लगने लगता है।" इसी आलेख से

"यह देश तय करे कि उसे प्रधानमंत्री की प्रशंसा चाहिए या देश की तबाही? हम आखिर कहाँ आ गये हैं? क्या सचमुच राजनैतिक नेता गैरतहीन हो गये हैं?" - इसी आलेख से

"कार्नेलिया दूसरे देश की है, मगर भारतवर्ष के सौंदर्य और स्वभाव पर मुग्ध है। मगर आज क्या हो रहा है। कार्नेलिया जो अनजान क्षितिज थी, उसे देश सहारा देता था, मगर आज अपने वाशिंदों का भी सहारा छीनने को उत्सुक है।" - इसी आलेख से

"विपक्ष बस सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। सदन का तो पता नहीं, पर इतना सुनकर मुझे तो यकीन हो गया मुझे ज़रूर गुमराह किया जा रहा। पक्ष हो, या विपक्ष, सरकार किसी की भी हो, होती तो जनता के लिए ही है।" इसी आलेख से

"बीजेपी ने जिसे 'पप्पू' कह कर नीचा दिखाना चाहा, वह 'राउडी' कैसे हो गया? ...... बीजेपी ने इतना नोंचा-खसोटा, लोकतंत्र की जैसी-तैसी की, बार-बार निशाना ठोकता रहा कि सीधा बैल मरखंडा हो गया।" - इसी आलेख से

"मोदी जी का सपना है कि 6G कि अगुवाई भारत करेगा। साथ ही 5G भारत में सबसे तेजी से फैल रहा है। सरकार क्या यह अपनी उपलब्धि बता रही है? पूरा का पूरा टेलीकॉम सेक्टर निजी हाथों में है।" - इसी आलेख से

"मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं - सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह किसी से ट्रेनिंग नहीं लेती। मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। वह जन्म लेता है और माँ-पिता, सगे-संबंधी, समाज और परिस्थितियाँ उसे ट्रेन करने लगते हैं।" - इसी आलेख से

"हम एक आर्थिक इकाई का गठन करते हैं। मान लीजिए हम उसे नाम देते हैं — आदर्शपुर पब्लिक पालिका।------- इस इकाई के पास अब बजट बनाने की क्षमता और पैसे दोनों होंगे। पब्लिक इस इकाई से स्कूल और हॉस्पिटल माँगेगी। जन-प्रतिनिधि आदर्शपुर नगर पालिका के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में हर जरूरी संसाधन की आपूर्ति करेगी। इस स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे का पिता इस संस्था का स्टेकहोल्डर होगा। ---।" - इसी आलेख से

"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिंदी पट्टी में चुनावी काम जय श्री राम से चल जाता था। बंगाल में श्री राम बहुत महत्वपूर्ण देवता नहीं हैं। उनसे वहाँ वोट उगाही नहीं हो सकती, इसलिए इस बार वे जय काली पर उतर आए हैं।" - इसी आलेख से