
"बंगाल में इन्होंने मछली खा ली तो वह मछली शाकाहारी हो गयी और जब ये अरुणाचल जायेंगे, जहाँ लोग कुत्ते को प्यार से खाते हैं, वहाँ ये लोग कुत्ते खायेंगे और कहेंगे कि मैंने शाकाहारी कुत्ता खाया।" - इसी आलेख से

"पीपर के नीचे हँसी- मजाक और कभी बोगिलबाजी। हम बच्चे बोगिल (धरती पर चौकोर खींचीं रेखाएँ) बनाकर गुल्लियाँ टनकारते। अब गाँव से गुल्ली और गाय दोनों ग़ायब हो गए हैं।"

"प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जानते थे कि जिस तरह की शर्तें वे महिला आरक्षण बिल में जोड़ रहे हैं, उन्हें विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। इन शर्तों को लागू करने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, जो उनके पास है नहीं। फिर उन्होंने अचानक लोकसभा की बैठक क्यों बुलाई?" - इसी आलेख से

"युद्ध अगर बदतमीजों के हथियार हैं तो गुनगुनाना इंसानों के। सभ्यताएँ गुनगुनाने से समृद्ध होंगी।" - इसी आलेख से

"चुनाव में निष्पक्षता किताबों में पढ़िए और ख़ुश रहिए। मरती हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हम सब दिग्दर्शन करें।" - इसी आलेख से

फर्जी इतिहास-बोध न केवल अपनी विरासत को नकारता है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी नकारता है। कैसे? पढ़ें यह लेख।

आजादी के संघर्ष में "भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केवल एक संगठन नहीं थी, बल्कि वह उस चेतना का नाम थी, जिसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया।" - इसी आलेख से

"वतन के वास्ते मिट गए बिस्मिल जैसे हज़ारों लोग और अब के सत्ताधारी स्वार्थ के वास्ते वतन को ही चींथ रहे हैं।" - इसी आलेख से

"सच यह है कि आँधी-तूफ़ान तो यहाँ आया हुआ है, जिसमें देश की बौद्धिक क्षमता चुक गई है और अबौद्धिक मेंढक की तरह टर्रा रहा है।" इसी आलेख से

नीतीश कुमार की कहानी उस राजनीतिक बदलाव की कहानी है, जो, राष्ट्रीय राजनीति के दबाव में, सत्ता के केंद्र से हाशिये की ओर ढकेला जाता है।