इन दिनों : माथे पर मुरैठा और दिमाग में नफ़रत की नदी

आज डॉ० अम्बेडकर का परिनिर्वाण दिवस है और बाबरी मस्जिद को ढाहने का दिवस भी। अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस के दिन बाबरी मस्जिद को ढाहने वाले आज भी झुग्गी-झोपड़ियों को ढाहते चले जा रहे हैं।



सुबह सूरज ठीक से उगा नहीं। सूरज पर कटे-कटे बादल छाये रहे। ठंड के कारण खिड़कियां बंद रहती हैं, इसलिए चिड़िया के स्वर सुनाई नहीं पड़े। खिड़कियों में लगे शीशे के बाहर सबकुछ शांत लगता है। आम, नारियल और महुगनी…






