
"सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है, लेकिन दूसरी तरफ प्रधानमंत्री स्वयं ईंधन बचत की अपील कर रहे हैं। यहीं से राजनीतिक प्रश्न उठते हैं? यदि स्थिति नियंत्रित थी, तो जनता से अचानक इतनी बड़ी मितव्ययिता की माँग क्यों की जा रही है?" - इसी आलेख से

"मौजूदा भारत में हिप्पोक्रेसी का बाज़ार सर्वोत्तम है। सरकार चाहे तो हिप्पोक्रेसी को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बोली लगा सकती है। हरेक दिशा में असफलता के बाद हिप्पोक्रेसी में वह गगनचुंबी छलाँग और सफलता प्राप्त कर सकती है।" - इसी आलेख से

"तमिलनाडु का यह चुनाव केवल सरकार परिवर्तन की घटना नहीं है। यह उस नई राजनीतिक बेचैनी का परिणाम है, जिसमें युवा मतदाता पारंपरिक दलों से अलग विकल्प की तलाश कर रहा है। विजय उसी बेचैनी की राजनीतिक अभिव्यक्ति हैं।" - इसी आलेख से

"आप सॉफ्ट और हार्ड की बात मत कीजिए। आपने संविधान की शपथ खाई है। संविधान के तहत काम कीजिए। जो संविधान के तहत काम नहीं करता है, उसका व्यवहार चाहे जितना सॉफ्ट हो, वह कम ख़तरनाक नहीं है।" - इसी अल्लेख से

"भारत की मौजूदा राजनीति एक चक्रव्यूह में फँस गई है। इस राजनीति के लिए भ्रष्टाचार बहुत ज़रूरी है। अगर आप भ्रष्ट और बदतमीज़ नहीं हैं तो इस राजनीति से दूर रहिए। " - इसी आलेख से

"राजनीति में सुपुत्रों की कोई कमी नहीं है। हमाम में अब सब नंगे हैं। इसकी आलोचना और निंदा भरपूर करें। राजनीति में गिरावट के प्रति भी चिंतित हों, लेकिन मेरा सवाल है कि राजनीति में गिरावट की क्या यह अकेली वजह है?" - इसी आलेख से

"गृहस्थ को तो घर चलाना है। उसकी चिंता समझ में आती है, लेकिन संत क्यों चिंतित है? दरअसल संत आज ज़्यादा चिंतित है, क्योंकि संतई छोड़ कर संतई का धंधा कर रहा है और धंधा तो महान चिंता का कारण है।" - इसी आलेख से

"हर नेता कहता है कि मैं तो जनता का सेवक हूँ, लेकिन सच यह है कि वह जनता का शासक है। जीत के बाद सेवा का कोई मतलब नहीं होता। यह तो महज एक जुमला है।" - इसी आलेख से

"आज संभव है कि सभी विपक्षी दल इस पर न सोचे और सिर्फ़ अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहें। यह भी हो सकता है कि सचेत नागरिक सत्ता की विकरालता और उसकी धौंस का सामना न कर सके, लेकिन लोकतंत्र के अपहरण का यह जीता-जागता मिसाल है।" - इसी आलेख से

"परसों रात को लगभग दो बजे नींद उचट गई तो मैंने बल्ब जलाया और स्वामी विवेकानंद की पुस्तक लेकर पढ़ने लगा। जब भी मन में बहुत ज़्यादा उद्वेलन होता है तो विवेकानंद सुकून देते हैं।" - इसी आलेख से