Category जन पत्रकारिता

इन दिनों : ट्रंप की दादागिरी और वेनेजुएला के सबक

"जिस युग में किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति और उसकी पत्नी को घसीट कर बंधक बनाया जा रहा हो, उस युग को ज्ञान का युग कहना, भारी बेवकूफी है। ट्रंप को जिसने वोट दिया, वह समझे कि एक बददिमाग आदमी को उसने वोट दिया है। अगर लोग सावधान नहीं रहे तो ट्रंप दुनिया को गटर बना देगा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : बदलते वक्त में बेचैन चेतना

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"सुख कब दुख में बदल जाता है, कहा नहीं जा सकता। देह बहुत सुखी हुआ तो डायबिटीज, ब्ल्डप्रेशर, कैंसर। मन को ज्यादा सुख मिला तो अकेलापन।" - इसी आलेख से

दूर हो गई नदी

"बाहरी लोगों के लिए वह जंगल पर्यटन-स्थल था, प्राकृतिक धरोहर था, सेल्फी-पॉइंट था। लेकिन गाँव के लोगों के लिए राशन कार्ड था, औषधालय था, रोजगार था और सुरक्षा भी।" - इसी आलेख से

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के मायने ….

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"दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति, उसी तरह की भयावह भीड़, किसी पौराणिक मंदिर की तरह एक घंटे में एक-दो कदम सरकने वाली स्थिति से होते हुए हम भीतर लिफ्ट से ऊपर पहुँचे, जहाँ गैलरी में देखने के नाम पर ऐसा कुछ नहीं था। कुछ आदमकद ऐतिहासिक फोटोज, बस!" - इसी आलेख से

इन दिनों : उच्च शिक्षा का हाल- बेहाल

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"कोई मक्खी यों ही नहीं निगलता। इसके लिए मूल्य चुकाने होते हैं। यह मूल्य पैरवी और पैसे के रूप में चुकाए जाते हैं, लेकिन इस मूल्य के बदले में मरती है उच्च शिक्षा।" - इसी आलेख से

इन दिनों : नया साल, नया कदम, नयी चुनौती

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"हम काल के साथ जितनी दूरी तय करते हैं, वह समय का एक खंड ही है। हम समय को खंडित कर ज्ञान प्राप्त करते हैं। यही वजह है कि हमारा ज्ञान खंडित होता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : 2025 का सफर, ये कैसा सफर

‘अवतार’ फिल्म का गाना है – ‘दिन महीने साल गुजरते जायेंगे, हम प्यार में जीते, प्यार में मरते जायेंगे।’ कोई दिन या क्षण नहीं ठहरा, तो बरस 25 भी नहीं ठहरा। समय ससर रहा है। अविराम बहता-सा रहा है। मनुष्य…

कुछ कुछ होता है

" इलेक्ट्रोल बांड के द्वारा जो पैसा आया, वह वैध बना रहा। इस बांड के द्वारा सरकार ने कितने घोटाले किए, पूँजीपतियों ने काले को सफेद बनाया, इसके बदले में सरकार ने पूँजीपतियों को ठेका दिया और सरकारी संपत्ति का वारा न्यारा किया - इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट चुप रहा। यह अधूरा फैसला था। अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी तह में जाकर व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलता तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बड़ी कृपा होती।" इसी आलेख से

हिंदू धर्म का इस्लाम हो जाना…

"क्रिसमस में चर्च जल रहे, युवाओं को पार्क में पीट रहे, नदी - मंदिर में किसी खास को जाने से रोक रहे। दूसरे धर्म के त्योहार में रुकावट बन रहे हैं तो अपने त्योहार को तमाशा बनाने पर तुले हैं। अरे, जबकि यह बस धर्म का विषय नहीं है, यह आपकी संस्कृति के हनन का विषय है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : विश्वगुरु बनने के नुस्खे

"कोई देश यों ही विश्वगुरु नहीं हो जाता। जहाँ महात्मा भी बलात्कार करते हों और इन महात्माओं की चरण वंदना सत्ता में बैठे लोग करते हों, ऐसे देश को विश्व गुरु बनने से कौन रोक सकता है।" - इसी आलेख से