
"सच बहुत कड़ुआ होता है, मगर एक समय ऐसा आता है कि बोलना पड़ता है। न चाहते हुए भी, लबों पर सच फूटने लगता है। क्योंकि सच बोलना समाज के जिंदा रहने का प्रतीक है।" - इसी आलेख से

"हम एक आर्थिक इकाई का गठन करते हैं। मान लीजिए हम उसे नाम देते हैं — आदर्शपुर पब्लिक पालिका।------- इस इकाई के पास अब बजट बनाने की क्षमता और पैसे दोनों होंगे। पब्लिक इस इकाई से स्कूल और हॉस्पिटल माँगेगी। जन-प्रतिनिधि आदर्शपुर नगर पालिका के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में हर जरूरी संसाधन की आपूर्ति करेगी। इस स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे का पिता इस संस्था का स्टेकहोल्डर होगा। ---।" - इसी आलेख से

"समुद्र पर काला अंधेरा फैला है, हहराती लहरें हैं। सिर्फ समुद्र की लहरों के सफेद झाग दिखाई पड़ते हैं। निरंतर समुद्र की आवाजें सुनाई पड़ रही हैं। देश में भी रोर और शोर है।" - इसी आलेख से

"अस्तित्वगत त्रयों की जरूरतें व्यक्ति और समाज के संबंध को आकार देती हैं। शरीर को कसरत चाहिए, चेतना को ज्ञान, और आत्मा को आनंद। इनमें से कोई भी चीज हमें बाज़ार में नहीं मिलती।" - इसी आलेख से

"मनुष्य में संभावनाएँ बहुत हैं। वह बहुत तरल होता है। उसमें संवेदनाएं बहती रहती हैं, इसलिए उसमें बदलाव की अपार संभावनाएँ हैं। वह परिस्थितियों का शिकार भी होता है और उसे बदल भी देता है।" - इसी आलेख से

"गणतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें सत्ता किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक चेतना और सहमति की होती है। सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने की क्षमता हर जन के मन में हो, बस यही गणतंत्र है।" - इसी आलेख से

"चिंता होती है, तभी चिंतन होता है। चिंता तात्कालिक स्थितियों से जुड़ी होती है और चिंतन चिंता की एक समझ है और है चिंता से उबरने के लिए रास्ते की तलाश। अगर चिंता न हो, तो चिन्तन संभव ही नहीं है।" - इसी आलेख से

"यह दुनिया आज नदी, सागर और जंगल के खिलाफ खड़ी है। जिन कारकों से दुनिया का सृजन हुआ है, आज नयी दुनिया को उत्पादित करने के लिए उनके खिलाफ ही खड़ी है।" इसी आलेख से

"क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि सिर्फ़ हमारा दिया आयकर सीधा स्थानीय इकाई को मिले, हमारे वार्ड और को पंचायत मिले। अकेला इनकम टैक्स ही सारे टैक्सों का 22 प्रतिशत होता है। केंद्र अपने पास 17% कॉर्पोरेट टैक्स रख ले। ऐसा करने से स्थानीय इकाई के पास कितने पैसे हैं, इसका पता चल पाएगा।" - इसी आलेख से

"गोवा के शहर और गाँव में बहुत अंतर नहीं है। बस या कार से जब आप चलेंगे तो स्थानीय घरों को देख कर पता करना मुश्किल होता है कि ये घर गाँव के हैं या शहर के। बहुत से घरों की छत चौड़े वाले खपड़ों से बनी है।" - गोवा के बारे में और जानने के लिए पढ़ें यह आलेख