
"व्यवहारों में संतुलन, सम्मान, संवाद। लोकतंत्र के लिए यह एकमात्र रास्ता है, मगर फ़िलहाल तो हर बात में विवाद। जनता भी विवादों में रुचि लेती है।" - इसी आलेख से

"प्रधानमंत्री का नौका विहार भी सुमित्रानंदन पंत का नौका विहार नहीं है। वे यहाँ भी वोट का व्यापार कर रहे हैं। बेचारे को कितना काम करना पड़ता है। मजा के लिए थोड़ा-सा जो भी वक़्त होता है, वह भी व्यापार की भेंट चढ़ जाता है।" - इसी आलेख से

"बंगाल में इन्होंने मछली खा ली तो वह मछली शाकाहारी हो गयी और जब ये अरुणाचल जायेंगे, जहाँ लोग कुत्ते को प्यार से खाते हैं, वहाँ ये लोग कुत्ते खायेंगे और कहेंगे कि मैंने शाकाहारी कुत्ता खाया।" - इसी आलेख से

"पीपर के नीचे हँसी- मजाक और कभी बोगिलबाजी। हम बच्चे बोगिल (धरती पर चौकोर खींचीं रेखाएँ) बनाकर गुल्लियाँ टनकारते। अब गाँव से गुल्ली और गाय दोनों ग़ायब हो गए हैं।"

"चाँद तो सूरज से रोशनी लेता है। आदमी भी एक-दूसरे से ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान ही तो आदमी की रोशनी है, वरना आठ जगहों से टेढ़े अष्टावक्र जनक के दरबारियों को चुनौती कैसे देता!" - इसी आलेख से

"इस दस्तावेज़ में किया गया आकलन उन सभी भारतीय भाषाओं पर लागू होता है, जिनका प्रयोग राज भाषाओं के रूप में हो रहा है। जो भारतीय भाषाएँ राजभाषाएँ नहीं हैं, उनकी दुर्दशा के बारे में तो बात न करना ही अच्छा होगा। इनमें से बहुत सी तो आखरी साँस ले रही हैं।"

"यह सच है कि काल की चक्की चल रही है, एक दिन उस चक्की में पिसना ही है, मगर मनुष्य आख़िर सच्ची ख़ुशी कहाँ से लाये?" - इसी आलेख से

"प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जानते थे कि जिस तरह की शर्तें वे महिला आरक्षण बिल में जोड़ रहे हैं, उन्हें विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। इन शर्तों को लागू करने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए, जो उनके पास है नहीं। फिर उन्होंने अचानक लोकसभा की बैठक क्यों बुलाई?" - इसी आलेख से

"डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर सभा हो और गांधी का ज़िक्र न हो, यह असंभव है। पूना पैक्ट के संदर्भ में गांधी पर कटाक्ष करना तो स्वभाव में शामिल हो गया है।" - इसी आलेख से

"हर जाति ने अपने नायक ढूँढ लिया है। आज़ादी की लड़ाई में वैसे नायक ढूँढे जाते थे, जिन्होंने देश के लिए शहादत दी हो। अब जब खा-पीकर तगड़े हो रहे हैं तो देखादेखी हरेक जाति ने अपने-अपने नायकों की तलाश शुरू की।" - इसी आलेख से