Category जन पत्रकारिता

शिक्षा : अधिकार से बाजार तक – नागरिक, कॉर्पोरेट और राज्य

शिक्षा, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक पुनरुत्पादन और नागरिक चेतना के निर्माण का माध्यम रही है, नवउदारवादी पूँजीवाद के चरण में एक ऐसी वस्तु में रूपांतरित की जा रही है जिसे बाज़ार में खरीदा–बेचा जा सकता है। राज्य, जो शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समानता और पुनर्वितरणकारी न्याय की भूमिका निभाने वाला कारक था, अब पूँजी के हितों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का स्थानांतरण कर रहा है। इस प्रक्रिया में नागरिक श्रम–शक्ति के वाहक और ऋणग्रस्त उपभोक्ता में बदलता जा रहा है, जबकि कॉर्पोरेट शिक्षा के क्षेत्र में मूल्य–अधिशेष के नए स्रोत के रूप में स्थापित हो रहा है।

इन दिनों : कहाँ आ गये हम, यों ही चलते-चलते

"मनुष्य में प्रकृति के दोनों गुण मौजूद हैं - सृजन भी और संहार भी। प्रकृति का अपना स्वभाव है। वह किसी से ट्रेनिंग नहीं लेती। मनुष्य के साथ ऐसा नहीं है। वह जन्म लेता है और माँ-पिता, सगे-संबंधी, समाज और परिस्थितियाँ उसे ट्रेन करने लगते हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : एक अधूरी लड़ाई को अंजाम तक ले जाने की जरूरत

"बीजेपी जातिवादी और संप्रदायवादी पार्टी है। उसके जेहन और उसके समर्थक संगठनों में जातिवादी विषाणु है।‌ वह अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू एकता की बात करती है, लेकिन जाति खत्म करने की बात नहीं करती।" - इसी आलेख से

टैक्स पर टिप्पणी

"जब तक किसी को अशिक्षा, बीमारी, और युद्ध से मुनाफा होता रहेगा, कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकारों की पहली प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य होना चाहिए, जो हमें सिर्फ़ वहीं मिल सकता है, जहाँ हम रहते हैं।" - इसी आलेख से

इन दिनों : वसंत के चपल-चरण और मान-अपमान कथा

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"पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 100 छात्रों ने आत्महत्या की है। इनमें से प्रायः सभी छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से थे।" - इसी आलेख से

इन दिनों : लोकतंत्र, नागरिक-बोध और हत्यारे

A gray tour bus parked on a road.
"सच बहुत कड़ुआ होता है, मगर एक समय ऐसा आता है कि बोलना पड़ता है। न चाहते हुए भी, लबों पर सच फूटने लगता है। क्योंकि सच बोलना समाज के जिंदा रहने का प्रतीक है।" - इसी आलेख से

बेरोजगारी हटाओ!

"हम एक आर्थिक इकाई का गठन करते हैं। मान लीजिए हम उसे नाम देते हैं — आदर्शपुर पब्लिक पालिका।------- इस इकाई के पास अब बजट बनाने की क्षमता और पैसे दोनों होंगे। पब्लिक इस इकाई से स्कूल और हॉस्पिटल माँगेगी। जन-प्रतिनिधि आदर्शपुर नगर पालिका के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में हर जरूरी संसाधन की आपूर्ति करेगी। इस स्कूल में पढ़ रहे हर बच्चे का पिता इस संस्था का स्टेकहोल्डर होगा। ---।" - इसी आलेख से

समुद्र, चांद और सूरज का लाल गोला

"समुद्र पर काला अंधेरा फैला है, हहराती लहरें हैं। सिर्फ समुद्र की लहरों के सफेद झाग दिखाई पड़ते हैं। निरंतर समुद्र की आवाजें सुनाई पड़ रही हैं। देश‌ में भी रोर और शोर है।" - इसी आलेख से

पोल्युशन का सलूशन

"अस्तित्वगत त्रयों की जरूरतें व्यक्ति और समाज के संबंध को आकार देती हैं। शरीर को कसरत चाहिए, चेतना को ज्ञान, और आत्मा को आनंद। इनमें से कोई भी चीज हमें बाज़ार में नहीं मिलती।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सागर होता आदमी

people on beach during daytime
"मनुष्य में संभावनाएँ बहुत हैं। वह बहुत तरल होता है। उसमें संवेदनाएं बहती रहती हैं, इसलिए उसमें बदलाव की अपार संभावनाएँ हैं। वह परिस्थितियों का शिकार भी होता है और उसे बदल भी देता है।" - इसी आलेख से