"मनुष्य में संभावनाएँ बहुत हैं। वह बहुत तरल होता है। उसमें संवेदनाएं बहती रहती हैं, इसलिए उसमें बदलाव की अपार संभावनाएँ हैं। वह परिस्थितियों का शिकार भी होता है और उसे बदल भी देता है।" - इसी आलेख से
"गणतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें सत्ता किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक चेतना और सहमति की होती है। सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने की क्षमता हर जन के मन में हो, बस यही गणतंत्र है।" - इसी आलेख से
"चिंता होती है, तभी चिंतन होता है। चिंता तात्कालिक स्थितियों से जुड़ी होती है और चिंतन चिंता की एक समझ है और है चिंता से उबरने के लिए रास्ते की तलाश। अगर चिंता न हो, तो चिन्तन संभव ही नहीं है।" - इसी आलेख से
"यह दुनिया आज नदी, सागर और जंगल के खिलाफ खड़ी है। जिन कारकों से दुनिया का सृजन हुआ है, आज नयी दुनिया को उत्पादित करने के लिए उनके खिलाफ ही खड़ी है।" इसी आलेख से
"क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि सिर्फ़ हमारा दिया आयकर सीधा स्थानीय इकाई को मिले, हमारे वार्ड और को पंचायत मिले। अकेला इनकम टैक्स ही सारे टैक्सों का 22 प्रतिशत होता है। केंद्र अपने पास 17% कॉर्पोरेट टैक्स रख ले। ऐसा करने से स्थानीय इकाई के पास कितने पैसे हैं, इसका पता चल पाएगा।" - इसी आलेख से
"गोवा के शहर और गाँव में बहुत अंतर नहीं है। बस या कार से जब आप चलेंगे तो स्थानीय घरों को देख कर पता करना मुश्किल होता है कि ये घर गाँव के हैं या शहर के। बहुत से घरों की छत चौड़े वाले खपड़ों से बनी है।" - गोवा के बारे में और जानने के लिए पढ़ें यह आलेख
"जब धर्म गुरुओं को भी हड़ताल करने की नौबत आ जाए, तब तो हमें इस भ्रम से बाहर आ जाना चाहिए कि मंदिर के वहीं बन जाने से कोई चमत्कार नहीं हो पाएगा।" - इसी आलेख से
"भारत में तरह-तरह के रजवाड़े हुए और उनकी आपसी लड़ाई हुई। उनके बीच के अंतर्विरोध और संघर्ष ने बाहरी लोगों को अवसर दिया। आज भारत की एकता के लिए बहुसांस्कृतिक एकता की जरूरत है।" - इसी आलेख से
अर्थशास्त्र की बुनियाद अभाव पर टिकी है, और वाणिज्यशास्त्र का आधार व्यापार पर। आइए! समझते हैं कैसे? इस अध्याय में हम दोनों का अंतर समझेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि इनकी हमारी जिंदगी में क्या जरूरत है। जरूरी…
"पंडितों ने भी गजब कहर बरपा रखा है। ठंड है तो मंदिरों के देवता काँपने लगते हैं। पंडित ऊनी कपड़े का इंतजाम करते हैं। गर्मी है तो एयरकंडीशन। देवताओं के लिए हर मौसम में यथोचित इंतजाम है। देवता खुश, पंडित खुश।" - इसी आलेख से