परीक्षा का पाप

"परीक्षा इतनी जरूरी हो गई है कि कुछ भी कर उसे जीतना है। युद्ध भी है, और प्यार भी — यहाँ सबने सब कुछ जायज़ मान लिया है। साम-दाम-दंड-भेद किसी भी तरह बस परीक्षा निकालनी है।" - इसी आलेख से
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युवा लेखक और चिंतक, दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री ( गोल्ड मेडलिस्ट)

सुकांत कुमार
सुकांत कुमार

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