
"जड़ों से उखड़े हुए लोग आदतन प्रेम, सद्भाव और सहकार से वंचित होते जाते हैं। माँ की गोदी, पिता से मिले व्यवहार, आस-पड़ोस के संबंधों की ख़ुशबू से अगर उखड़ गए तो फिर वे कहीं टिकते नहीं।" - इसी आलेख से

"हर देश को देखिए। उसने विष के दाँत विकसित किए हैं। अपनी आय या कर्जखोरी का बड़ा हिस्सा मारने के उपकरण पर खर्च कर रहे हैं।" - इसी आलेख से

"जहाँ रचना है, वहाँ सीमाहीनता है। जहाँ कट्टरता है, वहाँ सीमाएँ-ही-सीमाएँ हैं।" - इसी आलेख से

"मुड़वारा के बारे में तीन क़िस्से हैं, जिनमें से एक है अंग्रेज़ों और बाग़ियों से संबंधित। लोग सत्ता के ख़िलाफ़ बगावत न कर दें, इसके लिए अंग्रेज़ बाग़ियों के सिर काटकर टाँग देते थे। इसलिए इस स्थल का नाम मुड़वारा है।" - इसी आलेख से

नीतीश कुमार की कहानी उस राजनीतिक बदलाव की कहानी है, जो, राष्ट्रीय राजनीति के दबाव में, सत्ता के केंद्र से हाशिये की ओर ढकेला जाता है।

"धूप से जले हुए मंजर धरती पर बिखरे पड़े हैं। कुछ दिन पूर्व पेड़ों के लाड़ले थे, अब उपेक्षित हैं। उपेक्षा टीस मारती है। जीवन को दग्ध करती है, लेकिन सीख भी देती है।" इसी आलेख से

18 मार्च, 1974 को आंदोलनरत तीन छात्रों से गोलियों से भून दिया गया था। इसलिए आज का दिन राजकीय उत्पीड़न और कुव्यवस्था के विरुद्ध उन आंदोलनरत छात्रों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के साथ ही जेपी आंदोलन में शामिल राजनीतिक दलों की वर्तमान प्रवृत्तियों पर भी विचार करने की जरूरत है।

"राष्ट्रों की भाषा छीनकर और सभी क्षेत्रों में एक अपारदर्शी एवं पराई भाषा थोपकर उन्हें नष्ट करना एक मानक औपनिवेशिक प्रथा रही है, जिससे मूल निवासियों को उच्च और लाभप्रद शिक्षा, ज्ञान, तकनीक, विरासत, इतिहास, संस्कृति और शक्ति एवं लाभ के स्थानों से बाहर रखा जा सके।" इसी आलेख से

"चुनाव में रोग लगा और अब यह कैंसर का रूप ले रहा है। इसका ठीक से इलाज नहीं हुआ तो लोकतंत्र को राजतंत्र या सैनिक तंत्र में बदलने में देर नहीं लगेगी।" - इसी आलेख से

विस्थापन की त्रासदियों और पीड़ाओं को शब्दों में बाँधने की कोशिश करता साहित्यिक लेख