Category जन पत्रकारिता

इन दिनों : कहाँ जाई, का करी?

"सोलहवीं सदी में भी 'जीविका-बिहीन' लोग खुद से सवाल करते थे- कहाँ जायें, क्या करें? आज भी पूरी दुनिया की कम से कम आधी जनसंख्या सोलहवीं सदी की तरह ही अनिश्चित जीवन जी रही है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : मवालियों के पैने नख-दंत

A vibrant carnival scene in Pachuca, Hidalgo with colorful costumes and traditional masks.
"नफ़रत नयी दुनिया नहीं रच सकती। हिंसा सदा विध्वंस करती है। आज मनुष्य के अंदर जो व्याकुलता है, वह सामान्य व्याकुलता नहीं है। इस व्याकुलता ने मनुष्य के स्तर को बहुत नीचे गिरा दिया है, क्योंकि यह व्याकुलता में रचने की ख्वाहिश नहीं है। एक तरह से विध्वंस का आह्वान है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : पटरी पर दौड़ती टमटम

"ईरान पर थोपे गए युद्ध रूक नहीं रहे और वह क्रमशः भयानक होते जा रहे हैं। इस मार्ग से आते-जाते जहाज पर हमले हो रहे हैं और ईरान ने तो यहाँ तक कहा है कि समुद्र का पानी खून से लाल कर देंगे। वे समुद्र का पानी जब लाल करेंगे, तो करेंगे, लेकिन यहाँ तो अनेक देशों के खून सूख रहे हैं।" इसी आलेख से

इन दिनों : लोकतंत्र और खंडित मानव

Protest sign reading 'Defend Democracy, Fight Fascism' at an outdoor rally in Elk Grove, CA.
"व्यवहारों में संतुलन, सम्मान, संवाद। लोकतंत्र के लिए यह एकमात्र रास्ता है, मगर फ़िलहाल तो हर बात में विवाद। जनता भी विवादों में रुचि लेती है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : बाबू मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं 

A serene boat ride capturing the essence of Ambarawa, Indonesia, on a calm morning.
"प्रधानमंत्री का नौका विहार भी सुमित्रानंदन पंत का नौका विहार नहीं है। वे यहाँ भी वोट का व्यापार कर रहे हैं। बेचारे को कितना काम करना पड़ता है। मजा के लिए थोड़ा-सा जो भी वक़्त होता है, वह भी व्यापार की भेंट चढ़ जाता है।" - इसी आलेख से

इन दिनों : सत्ता की शाकाहारी मछलियाँ 

fish dish on blue ceramic plate
"बंगाल में इन्होंने मछली खा ली तो वह मछली शाकाहारी हो गयी और जब ये अरुणाचल जायेंगे, जहाँ लोग कुत्ते को प्यार से खाते हैं, वहाँ ये लोग कुत्ते खायेंगे और कहेंगे कि मैंने शाकाहारी कुत्ता खाया।" - इसी आलेख से

इन दिनों : पीपल का साधु-भाव और गोबर-गौमूत्र के जलवे 

"पीपर के नीचे हँसी- मजाक और कभी बोगिलबाजी। हम बच्चे बोगिल (धरती पर चौकोर खींचीं रेखाएँ) बनाकर गुल्लियाँ टनकारते। अब गाँव से गुल्ली और गाय दोनों ग़ायब हो गए हैं।"

इन दिनों : और चाँद चू गया

A clear view of the full moon against a blue night sky with a bare tree in the foreground.
"चाँद तो सूरज से रोशनी लेता है। आदमी भी एक-दूसरे से ज्ञान प्राप्त करता है। ज्ञान ही तो आदमी की रोशनी है, वरना आठ जगहों से टेढ़े अष्टावक्र जनक के दरबारियों को चुनौती कैसे देता!" - इसी आलेख से

भारतीय भाषाओं को कितना खतरा है?

"इस दस्तावेज़ में किया गया आकलन उन सभी भारतीय भाषाओं पर लागू होता है, जिनका प्रयोग राज भाषाओं के रूप में हो रहा है। जो भारतीय भाषाएँ राजभाषाएँ नहीं हैं, उनकी दुर्दशा के बारे में तो बात न करना ही अच्छा होगा। इनमें से बहुत सी तो आखरी साँस ले रही हैं।"

इन दिनों : अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़त्म…

man and woman sitting on rock near sea during daytime
"यह सच है कि काल की चक्की चल रही है, एक दिन उस चक्की में पिसना ही है, मगर मनुष्य आख़िर सच्ची ख़ुशी कहाँ से लाये?" - इसी आलेख से